सोनम वांगचुक एक पागल आदमी का नाम है

सोनम वांगचुक
सुदूर किसी ठंडी जगह से आए
उष्ण व्यक्ति का नाम है
उष्ण है, उग्र नहीं,
उत्सुक है, उतावला नहीं,
मृदु है, तीक्ष्ण नहीं,
सुकोमल है, कठोर नहीं,
नव प्रवर्तक, नव वैज्ञानिक, नव विचार वादी है,
फिर भी पागल है ।
पागल है
कि ठंडी,शांत,मनोहर, पहाड़ी जगह से
उष्ण जगह पर आता है,
मेवे और फल छोड़कर
भूखों मरता है,
नव दृष्टि पाने के बाद भी
नव क्रांति की बात करता है,
पागल है वह
कि लोग कहते हैं
उसे मिनिस्टर बनना है
उसे प्रचार पाना है
उसे अपना नाम करना है।
इडियट है ये
थ्री इडियट का फुनसुख वांगडू,
कि बच्चों के दर्द देखकर
पहाड़ छोड़कर आया है हम सोए लोगों के बीच,
जगाने, उठाने, बताने
कि थोड़ा सा पागलपन तो रखो पास,
कि ज्यादा सयाने होने का आखिर क्या ही हासिल,
कि सामने रिसती रहे जवानी
और तुम्हारी जुबान को लकवा मार जाए,
कि सामने आत्महत्या करते दिखें बच्चे
और तुम्हारी जुबान गले में घुट जाए।
सोनम वांगचुक
एक पागल व्यक्ति का नाम है,
जो भूखे पेट दम लगाकर बोल रहा है,
कि सयाने लोगों
पागल होकर ही सही
कुछ तो बोलो
कुछ तो बोलो
कि कुछ भी न बोलने से तुम
जिंदा होने का आभास कैसे भर सकते हो अपने भीतर।
वीरेंदर भाटिया
