सतनामियों के आंदोलन के कारण ही ब्रितानी हुकूमत छत्तीसगढ़ में एक भी बूचड़ खाना नहीं खोल सकी थी

काफी दिनों से हमारे छत्तीसगढ़ की शांत फिजा में कथित और स्वघोषित #गौरक्षकों के द्वारा #सतनामीसमाज के लोगों के साथ कभी गौ हत्या तो कभी गौ तस्करी के नाम पर मारपीट की जा रही है। अभी हाल के दिनों में रायपुर जिले की आरंग तहसील अन्तर्गत गुदगुदा अमेठी गांव के निवासी बलरामकुर्रे के साथ, गाय को जानवर कहने पर #गोल्डी_शर्मा नाम के व्यक्ति के द्वारा मारपीट की गई। सतनामी समाज के लोगों के साथ गाय के नाम पर मारपीट करने की ये कोई नई घटना नहीं है। ऐसा काफी दिनों से चल रहा है। ऐसी घटनाएं सभ्य समाज में कलंक के समान हैं। शासन-प्रशासन को ऐसे स्वयंभू गौरक्षकों पर नकेल कसने की सख्त जरूरत है। नहीं तो इन कथित गौभक्तों की कारस्तानी से जो चिंगारी निकल रही है वो कभी भी शोलों का रूप धर सकती है, फिर उससे जो आग लगेगी उस पर काबू पाना मुश्किल हो जाएगा।
गाय के नाम पर राजनीति करने वाले इन मवालियों को सतनामी और सतनाम पंथ के बारे में कुछ भी पता नहीं है। सतनामी समाज के लोगों और सतनामी गुरुओं ने अंग्रेजों के शासनकाल में गौरक्षा के लिए कितना बड़ा आंदोलन किया था, ये इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज है। सतनामियों के आंदोलन के कारण ही ब्रितानी हुकूमत छत्तीसगढ़ में एक भी बूचड़खाना नहीं खोल सकी थी।

मनोज पाठक
