पंडवानी की अमर स्वर-सम्राज्ञी तीजन बाई नहीं रहीं, छत्तीसगढ़ ने अपनी सांस्कृतिक पहचान का सबसे उज्ज्वल सितारा खो दिया
भूमकाल समाचार | शोक समाचार

रायपुर, 5 जुलाई। छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश की लोक-सांस्कृतिक विरासत के लिए आज का दिन अत्यंत दुखद है। विश्वविख्यात पंडवानी गायिका, पद्म विभूषण से सम्मानित लोककला की महान साधिका तीजन बाई का लंबी बीमारी के बाद रायपुर के एम्स में निधन हो गया। वे 70 वर्ष की थीं। पिछले कई सप्ताह से उनका इलाज चल रहा था और उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी।
तीजन बाई केवल एक लोकगायिका नहीं थीं, बल्कि वे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान की जीवित प्रतीक थीं। उन्होंने अपनी सशक्त आवाज़, अद्भुत अभिनय और अनोखी प्रस्तुति शैली से पंडवानी जैसी लोककला को गांवों की चौपाल से उठाकर विश्व के प्रतिष्ठित मंचों तक पहुंचाया। उन्होंने महाभारत की कथाओं को जिस जीवंतता और भाव-प्रवाह के साथ प्रस्तुत किया, उसने देश-विदेश के करोड़ों लोगों को भारतीय लोकपरंपरा से जोड़ा।
1956 में दुर्ग जिले के गनियारी गांव में जन्मी तीजन बाई ने बेहद कठिन परिस्थितियों में अपना जीवन शुरू किया। सामाजिक विरोध, आर्थिक अभाव और व्यक्तिगत संघर्षों के बावजूद उन्होंने अपनी कला का दामन नहीं छोड़ा। वे पंडवानी की कपालिक शैली में प्रस्तुति देने वाली पहली महिला कलाकारों में शामिल रहीं और इसी साहस ने उन्हें लोककला की नई पहचान दिलाई।
उनकी असाधारण कला साधना के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री (1988), पद्मभूषण (2003) और पद्मविभूषण (2019) जैसे देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, संगीत नाटक अकादमी फैलोशिप तथा अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए।
तीजन बाई का निधन केवल एक कलाकार का जाना नहीं है, बल्कि भारतीय लोकसंस्कृति के एक युग का अवसान है। उनकी आवाज़, उनकी प्रस्तुति और लोककला के प्रति उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
भूमकाल समाचार परिवार महान लोकगायिका पद्म विभूषण तीजन बाई को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता है।
भावपूर्ण श्रद्धांजलि। 🌹
