छत्तीसगढ़

नकटी महापंचायत में न्याय की हुंकार: ‘निस्तारी भूमि बचाओ, बेघर ग्रामीणों को पुनर्वास दो’

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रायपुर/नकटी (भूमकाल समाचार)।
रायपुर जिले के ग्राम पंचायत नकटी (सम्मानपुर) में कथित अवैध बेदखली, निस्तारी भूमि के स्वरूप परिवर्तन और बिना पुनर्वास किए 77 परिवारों के मकान तोड़े जाने के विरोध में आज सर्व छत्तीसगढ़िया समाज की महापंचायत आयोजित की गई। महापंचायत में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर प्रशासन से न्याय और पुनर्वास की मांग उठाई।
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत नकटी के खसरा नंबर 460, रकबा 15.4790 हेक्टेयर भूमि पर वर्षों से ग्रामीणों का पारंपरिक निस्तारी अधिकार रहा है। राजस्व अभिलेखों के अनुसार यह भूमि निस्तार, चारागाह (चरनोद) एवं गौठान के लिए आरक्षित है। इसके बावजूद इस भूमि पर विधायक कॉलोनी अथवा हाउसिंग बोर्ड की आवासीय परियोजना प्रस्तावित करना कानून और राजस्व नियमों के विपरीत बताया जा रहा है।


ग्रामीणों का कहना है कि राज्य सरकार की आदर्श पुनर्वास नीति-2007 के प्रावधानों के अनुसार प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक आवास, बसाहट और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराए बिना किसी भी प्रकार की बेदखली नहीं की जा सकती। इसके बावजूद बरसात के बीच 77 मकानों को ध्वस्त कर सैकड़ों लोगों को बेघर कर दिया गया, जिसे उन्होंने अमानवीय और गैर-कानूनी कार्रवाई बताया।


महापंचायत में यह भी दावा किया गया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के ‘जगपाल सिंह बनाम पंजाब राज्य (2011)’ के निर्णय तथा राज्य शासन के राजस्व विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार निस्तारी एवं सार्वजनिक उपयोग की भूमि का स्वरूप परिवर्तन नहीं किया जा सकता। ऐसे में इस भूमि का किसी आवासीय परियोजना के लिए उपयोग वैधानिक प्रश्नों के घेरे में है।


ग्रामीणों ने बताया कि 4 सितंबर 2024 को आयोजित ग्राम सभा की बैठक में प्रस्ताव क्रमांक-13 के माध्यम से सरपंच, उपसरपंच, पंचों और ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से इस प्रस्तावित आवंटन एवं निर्माण का विरोध किया था। उनका कहना है कि ग्राम सभा की सहमति के बिना सार्वजनिक भूमि का अन्य उपयोग 73वें संविधान संशोधन और पंचायती राज व्यवस्था की भावना के विपरीत है।


महापंचायत में उपस्थित लोगों ने कहा कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध का नहीं, बल्कि संविधान, कानून और ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा के लिए है। उन्होंने मांग की कि प्रभावित परिवारों का तत्काल पुनर्वास किया जाए, निस्तारी भूमि की मूल स्थिति बहाल की जाए तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।


(नोट: उपरोक्त कानूनी एवं तथ्यात्मक दावे महापंचायत में ग्रामीणों और आयोजकों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों एवं आरोपों पर आधारित हैं। प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

फार्मासिस्ट राहुल वर्मा की खबर

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