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‘मोर गांव–मोर पानी’ अभियान का पहली बारिश के साथ ही दिखने लगा असर

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डबरियां और नवा तरिया हुए लबालब, गांवों में बढ़ी जल सुरक्षा और आजीविका की उम्मीद

रायपुर, 4 जुलाई। प्रदेश में मानसून की सक्रियता के साथ ही राज्य सरकार के ‘मोर गांव–मोर पानी’ महाअभियान के सकारात्मक परिणाम अब ज़मीन पर साफ़ दिखाई देने लगे हैं। हाल की अच्छी बारिश से अभियान के तहत बनाई गई आजीविका डबरियां, नवा तरिया और अन्य जल संरक्षण संरचनाएं तेजी से पानी से भर रही हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ने के साथ-साथ खेती, पशुपालन और आजीविका के नए अवसर भी मजबूत होने की उम्मीद है।
राज्य सरकार के अनुसार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर प्रदेशभर में निर्मित 15 हजार से अधिक आजीविका डबरियां वर्षा जल का प्रभावी संचयन कर रही हैं। वहीं ‘नवा तरिया–आय के जरिया’ अभियान के तहत विकसित 700 से अधिक सामुदायिक तालाब भी लबालब भरने लगे हैं। इन जल संरचनाओं का उपयोग सिंचाई, मत्स्य पालन, बागवानी और अन्य आयवर्धक गतिविधियों के लिए किया जाएगा।
जल संरक्षण को और गति देने के लिए 1 जुलाई से लागू वीबीजी रामजी योजना के अंतर्गत भी बड़े पैमाने पर कार्य स्वीकृत किए गए हैं। कुल 318 कार्यों में से 108 कार्य सीधे जल संरक्षण और जल संवर्धन से जुड़े हैं, जिनका उद्देश्य वर्षा जल का अधिकतम संचयन, भू-जल पुनर्भरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना है।
सरकार का दावा है कि ‘मोर गांव–मोर पानी’ अभियान के तहत प्रदेश में एक लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है, जिन पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के माध्यम से लगभग 1,600 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं।
बारिश के शुरुआती दौर में ही इन संरचनाओं का भरना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि यदि इनका नियमित रखरखाव और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित किया जाए, तो आने वाले वर्षों में यह अभियान जल संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण रोजगार, कृषि उत्पादन और आजीविका सशक्तीकरण का मजबूत आधार बन सकता है।

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