सत्ता के बुलडोज़र तले कुचले गए गरीबों के आशियाने;
भूमकाल समाचार विशेष रिपोर्ट

बिना सूचना जीपीएम के कोरजा में आदिवासी और दलित परिवारों को किया बेघर
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही: छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले से मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक खबर सामने आई है। यहाँ ५ मई २०२६ को प्रशासन ने अपनी संवेदनहीनता का परिचय देते हुए गौरेला ब्लॉक के पंडरीपानी रेंज अंतर्गत ग्राम कोरजा में कई आदिवासी एवं दलित परिवारों के घरों पर बुलडोज़र चला दिया।
बिना सूचना के हुई बर्बर कार्रवाई
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि उन्हें इस कार्रवाई की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। देखते ही देखते वर्षों की मेहनत से बनाए गए मकान मलबे के ढेर में तब्दील हो गए। सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि इन ध्वस्त मकानों में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के तहत बने पक्के मकान भी शामिल थे। जिस योजना का उद्देश्य गरीबों को छत देना है, उसी योजना के घर को प्रशासन ने मिट्टी में मिला दिया।
आसमान के नीचे बचपन और भविष्य
इस अचानक हुई कार्रवाई ने न केवल छत छीनी, बल्कि बच्चों की शिक्षा और भविष्य पर भी प्रहार किया है। मलबे के नीचे छोटे-छोटे बच्चों की किताबें, स्कूल ड्रेस, राशन और दैनिक उपयोग की सभी वस्तुएं दब गईं। वर्तमान में ये परिवार अपने मासूम बच्चों के साथ खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। तपती धूप और अनिश्चित भविष्य के बीच इन परिवारों के पास अब सिर छुपाने की भी जगह नहीं बची है।
अधिकारों का खुला उल्लंघन
कोरजा के इन परिवारों का दावा है कि वे यहाँ पिछले ३० वर्षों से निवास कर रहे हैं। बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था, समुचित पुनर्वास या कानूनी नोटिस के इस तरह की कार्रवाई सीधे तौर पर उनके संवैधानिक और मानवीय अधिकारों का उल्लंघन है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और रसूखदारों की सांठगांठ के चलते हमेशा गरीबों को ही निशाना बनाया जाता है।
सत्ता और व्यवस्था पर सवाल
यह घटना प्रदेश की न्याय व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या इस देश में गरीब, आदिवासी और दलित परिवारों के आशियाने की कोई कीमत नहीं है? जहाँ एक ओर रसूखदारों के अवैध निर्माणों पर आंखें मूंद ली जाती हैं, वहीं सालों से रह रहे गरीबों को बेघर करने में प्रशासन पल भर की भी देरी नहीं करता।
भूमकाल समाचार इन पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा है और प्रशासन से मांग करता है कि दोषियों पर कार्रवाई हो और बेघर हुए परिवारों को तत्काल मुआवजा व आवास की वैकल्पिक व्यवस्था प्रदान की जाए।
प्रीति मांझी की रिपोर्ट
