जिन रसूखदारों ने 13-14-15-16 साल की मासूम बच्चियों को अपना शिकार बनाया,जिन्होंने एपस्टीन की उस गंदी दुनिया में शामिल होकर
महत्वपूर्ण बिंदु: उपलब्ध रिकॉर्ड उनके सम्मेलन में भाग लेने और द्वीप पर जाने की पुष्टि करते हैं। इससे आगे कोई सिद्ध आपराधिक निष्कर्ष इन दस्तावेज़ों से नहीं निकलता।
आज जब मैं अपनी डेस्क पर बैठकर स्मृतियों की खिड़की में झांकता हूं, तो अक्सर मेरी आंखें उन पन्नों के
बस्तर के वरिष्ठ पत्रकार अनिल मिश्रा के अनुभवों का दस्तावेज : जीवंत कहानियों की नजर से देखिये बस्तर भागो यहाँ