850 गांवों को बस से जोड़ना निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण शुरुआत है। लेकिन अगर सरकारी आंकड़े ही बताते हैं कि 4,368 गांव अभी भी बस सुविधा से बाहर हैं, तो असली कसौटी अब यह होगी कि दूसरे चरण की 60–80 बसें कब सड़कों पर उतरती हैं और कितने गांव वास्तव में नियमित सेवा से जुड़ते हैं। योजना की सफलता केवल बसों की संख्या से नहीं, बल्कि बस सुविधा से वंचित गांवों की संख्या घटने से मापी जानी चाहिए।