क्या जल-जंगल-जमीन और आदिवासी अधिकारों के सवाल उठाने वाले आंदोलनों को सुरक्षा कानूनों के सहारे दबाया जा रहा है?
इसका जवाब सरकार को देना चाहिए।
क्योंकि विकास का सवाल अपनी जगह है, लेकिन लोकतंत्र में विकास की कीमत यह नहीं हो सकती कि प्रभावित समुदाय से उसकी ग्रामसभा, उसकी आस्था और उसके सवाल पूछने का अधिकार ही छीन लिया जाए।