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मांदर की थाप पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया कर्मा नृत्य, बोले – आदिवासी संस्कृति और प्रकृति संरक्षण की परंपरा देश के लिए प्रेरणा

रायगढ़ के सारसमाल में कर्मा पूजा महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय। मांदर पर किया कर्मा नृत्य, युवाओं को शिक्षा और रोजगार के लिए प्रेरित किया।

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आंचलिकछत्तीसगढ़

रायपुर में आज करम परब महोत्सव, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय होंगे शामिल

आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और नई पीढ़ी तक उसका हस्तांतरण जरूरी है। करम परब जैसे पारंपरिक आयोजन इस विरासत को जीवंत रखने और सामाजिक एकजुटता को मजबूत करने का अवसर प्रदान करते हैं।

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चार साल तक बीमा दावा लटकाया, फिर किया खारिज; छत्तीसगढ़ सरकार ने ओरिएंटल इंश्योरेंस को तीन साल के लिए किया ब्लैकलिस्ट

भूमकाल समाचार का सवाल: जनता के पैसे से बीमा प्रीमियम चुकाने के बावजूद यदि सरकारी संपत्ति के नुकसान का दावा वर्षों तक अटका रहे और अंत में खारिज कर दिया जाए, तो केवल कंपनी को ब्लैकलिस्ट करना पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि बीमा राशि की वसूली हो, दावे में हुई देरी और अस्वीकृति के कारण सार्वजनिक किए जाएं तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में सरकारी संपत्तियों के बीमा दावों के साथ ऐसा न हो।

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सिंगापुर मॉडल से छत्तीसगढ़ के जंगलों को जोड़ने की तैयारी

सिंगापुर से सीखना अच्छी बात है, लेकिन छत्तीसगढ़ के जंगलों का भविष्य सिंगापुर की नकल से नहीं, बल्कि यहां के जंगल, वन्यजीव और स्थानीय समाज की वास्तविक जरूरतों को केंद्र में रखकर तय होना चाहिए।
इको-टूरिज्म तभी सफल माना जाएगा, जब जंगल भी बचें, स्थानीय समुदाय भी मजबूत हों और पर्यटन की कमाई का बड़ा हिस्सा उसी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में वापस पहुंचे। यह अच्छी बात है कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री इस दिशा में गंभीर है ।

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850 गांवों तक पहुंची बस, पर 4,368 गांव अब भी इंतजार में

850 गांवों को बस से जोड़ना निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण शुरुआत है। लेकिन अगर सरकारी आंकड़े ही बताते हैं कि 4,368 गांव अभी भी बस सुविधा से बाहर हैं, तो असली कसौटी अब यह होगी कि दूसरे चरण की 60–80 बसें कब सड़कों पर उतरती हैं और कितने गांव वास्तव में नियमित सेवा से जुड़ते हैं। योजना की सफलता केवल बसों की संख्या से नहीं, बल्कि बस सुविधा से वंचित गांवों की संख्या घटने से मापी जानी चाहिए।

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क्या जल-जंगल-जमीन और आदिवासी अधिकारों के सवाल उठाने वाले आंदोलनों को सुरक्षा कानूनों के सहारे दबाया जा रहा है?
इसका जवाब सरकार को देना चाहिए।
क्योंकि विकास का सवाल अपनी जगह है, लेकिन लोकतंत्र में विकास की कीमत यह नहीं हो सकती कि प्रभावित समुदाय से उसकी ग्रामसभा, उसकी आस्था और उसके सवाल पूछने का अधिकार ही छीन लिया जाए।

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बदलते बस्तर की तस्वीर: पर्यटन से विकास की नई राह

बस्तर अब केवल अतीत की कहानी नहीं है। यह संभावनाओं का नया अध्याय है, जहां जंगलों की हरियाली, जलप्रपातों की सुंदरता, जनजातीय संस्कृति की जीवंतता और स्थानीय लोगों की मेहमाननवाजी मिलकर छत्तीसगढ़ के पर्यटन को नई दिशा दे रही है। बस्तर की नई पहचान अब उसके अतीत से नहीं, बल्कि शांति, प्रकृति, संस्कृति, पर्यटन और स्थानीय विकास की नई संभावनाओं से लिखी जा रही है।

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देहदान पर सम्मान की घोषणा, लेकिन असली सवाल प्रोत्साहन का

भूमकाल समाचार का सुझाव है कि जो व्यक्ति जीवित रहते हुए देहदान या अंगदान का संकल्प लेता है, उसे सरकार केवल मृत्यु के बाद सम्मानित करने के बजाय उसके जीवनकाल में भी सम्मान और सुरक्षा का अनुभव कराए।

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अब दफ्तर नहीं, मोबाइल से जमीन का रिकॉर्ड!

भूमकाल नजरिया:
सरकारी रिकॉर्ड जितना सुरक्षित और नागरिकों के लिए जितना आसानी से उपलब्ध होगा, जमीन से जुड़े विवादों और अनावश्यक कार्यालयी भागदौड़ की गुंजाइश उतनी ही कम हो सकती है। अब असली परीक्षा योजना को जमीन पर समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से लागू करने की होगी।

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