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राजेंद्र शर्मा: वैचारिक पत्रकारिता की सशक्त आवाज़ और लोकजतन सम्मान की परंपरा

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भारतीय हिंदी पत्रकारिता में कुछ ऐसे नाम हैं जिन्होंने समाचारों को केवल सूचना तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें समाज, लोकतंत्र और जनसरोकारों की बहस का माध्यम बनाया। वरिष्ठ पत्रकार एवं लोकलहर के संपादक राजेंद्र शर्मा ऐसा ही एक सम्मानित नाम हैं। लगभग पाँच दशकों से सक्रिय राजेंद्र शर्मा ने राजनीति, अर्थव्यवस्था, संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय जैसे जटिल विषयों को सरल, तार्किक और आमजन की भाषा में प्रस्तुत करने की विशिष्ट पहचान बनाई है।

राजेंद्र शर्मा लंबे समय से लोकलहर के संपादक हैं। वे अपने विश्लेषणात्मक लेखन, वैचारिक स्पष्टता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता के लिए व्यापक रूप से जाने जाते हैं। उनकी लेखनी सत्ता से असहज प्रश्न पूछने, सामाजिक असमानताओं को रेखांकित करने और जनपक्षधर पत्रकारिता की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए पहचानी जाती है। उनके लेख देश के अनेक प्रतिष्ठित समाचार पत्रों, पत्रिकाओं और डिजिटल मंचों पर नियमित प्रकाशित होते रहे हैं।

पत्रकारिता के साथ-साथ उन्होंने अनेक पुस्तकों का भी लेखन किया है। ‘बहस अनंता’, ‘भूलने के विरुद्ध’ और ‘असत्य के प्रयोग’ जैसी पुस्तकें उनके गंभीर वैचारिक चिंतन और समसामयिक विश्लेषण की साक्षी हैं। जटिल राजनीतिक घटनाक्रमों को सहज भाषा में समझाने की उनकी क्षमता उन्हें हिंदी पत्रकारिता के अग्रणी संपादकों में स्थान दिलाती है।

इसी योगदान के सम्मानस्वरूप 24 जुलाई 2026 को भोपाल में उन्हें लोकजतन सम्मान 2026 से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान लोकतंत्र के मूल्यों, जनपक्षधर पत्रकारिता और निर्भीक लेखन की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले पत्रकारों को समर्पित है।

मेरे लिए यह अवसर इसलिए भी विशेष महत्व रखता है क्योंकि लोकजतन सम्मान से मेरा भी एक आत्मीय रिश्ता जुड़ा है। वर्ष 2020 में, जब पूरा देश कोरोना महामारी और लॉकडाउन की अभूतपूर्व परिस्थितियों से गुजर रहा था, मुझे भी लोकजतन सम्मान से सम्मानित किया गया था। महामारी के कारण समारोह प्रत्यक्ष रूप से आयोजित नहीं हो सका और मुझे यह सम्मान वर्चुअल कार्यक्रम के माध्यम से प्रदान किया गया। वह सम्मान मेरे लिए केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि जनपक्षधर और जिम्मेदार पत्रकारिता के प्रति मेरी प्रतिबद्धता का सम्मान था।

आज जब उसी सम्मान से वरिष्ठ संपादक राजेंद्र शर्मा को अलंकृत किया जा रहा है, तो यह न केवल उनके दीर्घकालीन योगदान का सम्मान है, बल्कि उस पत्रकारिता की भी प्रतिष्ठा है जो सत्ता से अधिक समाज के प्रति जवाबदेह होती है। ऐसे समय में, जब मीडिया की भूमिका पर लगातार प्रश्न उठ रहे हैं, राजेंद्र शर्मा जैसे वरिष्ठ पत्रकारों का सम्मान नई पीढ़ी के पत्रकारों को यह संदेश देता है कि निष्पक्षता, वैचारिक ईमानदारी और जनसरोकार ही पत्रकारिता की सबसे बड़ी पूंजी हैं।

राजेंद्र शर्मा को लोकजतन सम्मान 2026 के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ। साथ ही, इस सम्मान की उस गौरवशाली परंपरा को भी नमन, जिसका हिस्सा बनने का सौभाग्य मुझे वर्ष 2020 में प्राप्त हुआ।

कमल शुक्ला

Kamal Shukla

Kamal Shukla is a veteran journalist, editor, and media rights advocate from Bastar, Chhattisgarh, with over three decades of experience in grassroots journalism. He is the Editor of Bhumkal Samachar newspaper, BhumkalSamachar.com, and Bhumkal Samachar Magazine, where he leads reporting on tribal affairs, environmental issues, governance, human rights, and rural development across central India. Widely recognized for his fearless public-interest journalism, Shukla has consistently reported on issues affecting Adivasi communities, illegal mining, environmental conservation, and administrative accountability. He has also led the movement demanding a Journalists' Protection Law in Chhattisgarh as the head of the Patrakar Suraksha Kanoon Sanyukt Sangharsh Samiti. His work has received national and international recognition from press freedom organizations, including the International Federation of Journalists (IFJ) and Reporters Without Borders (RSF), for his commitment to defending press freedom despite facing legal harassment, physical attacks, and threats during his career.

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