‘हर घर शुद्ध जल’ का नया वादा, भूमकाल का सवाल—क्या अब बंद पड़ी नल-जल योजनाओं का भी होगा सोशल ऑडिट?

रायपुर, 10 जुलाई। छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन 2.0 के तहत ग्रामीण पेयजल योजनाओं के संचालन और रखरखाव को लेकर मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में मंत्रालय में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि ग्रामीण नल-जल योजनाओं के संचालन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को सौंपी जाएगी। साथ ही सोशल ऑडिट, ग्राम सभाओं में अनिवार्य समीक्षा, जल गुणवत्ता की निगरानी और भविष्य में वाटर मीटर लगाने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
सरकार का कहना है कि उद्देश्य हर ग्रामीण परिवार तक प्रतिदिन शुद्ध पेयजल पहुंचाना और योजनाओं को लंबे समय तक प्रभावी बनाए रखना है।
लेकिन भूमकाल समाचार के सवाल इससे आगे हैं।
क्या पंचायतों को जिम्मेदारी सौंपने से पहले यह सार्वजनिक किया जाएगा कि राज्य में जल जीवन मिशन के तहत बनी कुल कितनी नल-जल योजनाएं आज पूरी क्षमता से चल रही हैं और कितनी बंद या आंशिक रूप से संचालित हैं?
क्या सोशल ऑडिट केवल नई व्यवस्था का होगा, या अब तक खर्च किए गए हजारों करोड़ रुपये, अधूरे कार्यों, खराब पाइपलाइन, बंद मोटर, सूखी टंकियों और महीनों से पानी नहीं मिलने की शिकायतों की भी स्वतंत्र जांच होगी?
यदि भविष्य में पानी का शुल्क और वाटर मीटर लागू किए जाते हैं, तो क्या पहले सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि हर घर तक नियमित, पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण पेयजल वास्तव में पहुंच रहा है?
भूमकाल समाचार का मानना है कि जल जीवन मिशन की सफलता का पैमाना बैठकों और प्रस्तुतिकरणों से नहीं, बल्कि उस ग्रामीण परिवार से तय होगा जिसके घर के नल में हर दिन पानी आता है या नहीं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि पंचायतों को अधिकारों के साथ पर्याप्त वित्तीय और तकनीकी संसाधन भी मिलते हैं या केवल योजनाओं की जिम्मेदारी उनके कंधों पर डाल दी जाती है। जनता की निगाहें इस बात पर भी रहेंगी कि सोशल ऑडिट कागज़ों तक सीमित रहता है या वास्तव में जवाबदेही तय करता है।
