‘बस्तर अंजोर’ से बदलेगा बस्तर या बदलेगी सिर्फ सरकारी रिपोर्ट? एसडीजी 2.0 लागू, विकास पर फिर बड़े दावे

रायपुर/भूमकाल समाचार।
छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य नीति आयोग द्वारा तैयार एस.डी.जी. (सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स) 2.0 फ्रेमवर्क का विमोचन करते हुए बस्तर के लिए नई पहल ‘बस्तर अंजोर’ की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दावा किया कि यह पहल ‘विकसित छत्तीसगढ़ @2047’ के लक्ष्य को गति देगी और योजनाओं की निगरानी अधिक पारदर्शी, जवाबदेह तथा परिणाम आधारित होगी।
सरकार के अनुसार, नए फ्रेमवर्क में राज्य स्तर पर विकास संकेतकों की संख्या 275 से बढ़ाकर 343 तथा जिला स्तर पर 82 से बढ़ाकर 99 कर दी गई है। इसके लिए मेटाडेटा हैंडबुक भी जारी की गई है, ताकि सभी विभाग एक समान मानकों के आधार पर विकास का आकलन कर सकें।
सरकार ने ‘बस्तर अंजोर’ को बस्तर के समग्र विकास का नया मॉडल बताया है। इसमें ‘नियद नेल्लानार 2.0’, ‘बस्तर मुन्ने’ और ‘स्वस्थ बस्तर’ जैसी योजनाओं को एसडीजी-2030, विकसित छत्तीसगढ़-2047 और आकांक्षी जिला कार्यक्रमों से जोड़कर शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और आधारभूत ढांचे में बेहतर परिणाम लाने का दावा किया गया है।
हालांकि बस्तर को लेकर पहले भी कई योजनाएं और घोषणाएं होती रही हैं। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार विकास के दावे ज़मीन पर दिखाई देंगे, या ‘बस्तर अंजोर’ भी सरकारी दस्तावेजों और प्रस्तुतियों तक सीमित रह जाएगा? बस्तर के लोगों की अपेक्षा केवल नए फ्रेमवर्क या संकेतकों से नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सड़क, पेयजल और वनाधिकार जैसे बुनियादी मुद्दों पर वास्तविक बदलाव से है।
भूमकाल समाचार इस पहल के क्रियान्वयन और इसके वास्तविक प्रभाव पर लगातार नज़र बनाए रखेगा।
