उद्योगों संग होगी ‘हरियाली’ पर बैठक, लेकिन भूमकाल का सवाल—जंगल उजाड़ने वालों का हिसाब कौन देगा?

रायपुर, 10 जुलाई। मानसून-2026 के वृक्षारोपण अभियान की समीक्षा के लिए 12 जुलाई को आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी प्रमुख औद्योगिक घरानों के प्रतिनिधियों के साथ रायपुर में बैठक करेंगे। सरकार का कहना है कि बैठक में वृक्षारोपण, पौधों के संरक्षण, निगरानी व्यवस्था और उद्योगवार एक्शन प्लान पर चर्चा होगी।
लेकिन इस बैठक से पहले कई ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब छत्तीसगढ़ की जनता जानना चाहती है।
क्या बैठक में केवल नए पौधे लगाने के लक्ष्य गिनाए जाएंगे, या उन लाखों पौधों का भी हिसाब सामने आएगा जिनके रोपण का दावा पिछले वर्षों में किया गया था? उनमें से कितने आज जीवित हैं? कितनों का स्वतंत्र सत्यापन हुआ? और जिन उद्योगों पर पर्यावरणीय नियमों के पालन को लेकर समय-समय पर सवाल उठे हैं, उनकी जवाबदेही कैसे तय होगी?
छत्तीसगढ़ लंबे समय से खनन और औद्योगिक विस्तार का बड़ा केंद्र रहा है। इसके साथ ही जंगलों, जल स्रोतों और स्थानीय पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी लगातार बहस होती रही है। ऐसे में केवल वृक्षारोपण के लक्ष्य घोषित कर देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
भूमकाल समाचार का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण की असली परीक्षा फोटो खिंचवाकर पौधे लगाने से नहीं, बल्कि यह बताने से होगी कि उद्योगों ने प्रकृति को जितना नुकसान पहुंचाया, उसकी भरपाई के लिए वास्तव में क्या किया।
यदि सरकार पारदर्शिता चाहती है तो 12 जुलाई की बैठक के बाद प्रत्येक उद्योग का वृक्षारोपण लक्ष्य, वास्तविक उपलब्धि, पौधों की जीवित रहने की दर, निगरानी रिपोर्ट और पर्यावरणीय अनुपालन का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
हर साल हरियाली के दावे किए जाते हैं। इस बार जनता यह भी जानना चाहती है कि कागज पर जंगल बढ़े हैं या धरातल पर ।
