नकली बीज, खाद और कीटनाशक का काला कारोबार: किसान की मेहनत पर डाका, कार्रवाई सिर्फ दिखावा?

भूमकाल समाचार | विशेष रिपोर्ट
रायपुर । देश का अन्नदाता हर साल केवल मौसम की मार ही नहीं झेलता, बल्कि नकली बीज, खाद और कीटनाशक के संगठित कारोबार का भी शिकार बनता है। हजारों किसान अपनी जीवनभर की जमा पूंजी और कर्ज लेकर खेती करते हैं, लेकिन जब बीज अंकुरित नहीं होता, खाद में पोषक तत्व नहीं मिलते और कीटनाशक असर नहीं करते, तब पूरी फसल बर्बाद हो जाती है।
हाल ही में छत्तीसगढ़ के कवर्धा में हुई कार्रवाई ने इस गंभीर संकट को उजागर कर दिया। जांच में जिस पोटाश खाद की बोरी पर 60 प्रतिशत पोटाश लिखा था, प्रयोगशाला में उसमें 0 प्रतिशत पोटाश पाया गया। यह केवल एक दुकान या एक जिले का मामला नहीं, बल्कि किसानों से जुड़े एक बड़े नेटवर्क की आशंका को सामने लाता है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि हर वर्ष नकली कृषि सामग्री पकड़ी जाती है, लेकिन इनके निर्माता, सप्लायर और पूरे नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं होती? कुछ दुकानों को सील कर देना या नोटिस जारी कर देना क्या लाखों किसानों के नुकसान की भरपाई कर सकता है?
नकली कृषि सामग्री बेचने वाले केवल आर्थिक अपराध नहीं कर रहे, बल्कि किसानों के जीवन, देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर हमला कर रहे हैं। अनेक किसान फसल चौपट होने के बाद कर्ज के बोझ तले दब जाते हैं और कई मामलों में आत्महत्या तक की नौबत आ जाती है।
अब आवश्यकता केवल छापेमारी की नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क की जांच, दोषियों पर कठोर दंड, पीड़ित किसानों को उचित मुआवजा और कृषि विभाग की जवाबदेही तय करने की है।
जब तक ऐसा नहीं होगा, तब तक हर सीजन में किसान ठगा जाएगा और कार्रवाई केवल सरकारी कागजों तक सीमित रहेगी।
— भूमकाल समाचार
