बस्तर के बाजार हाट- खुला लूट-पाट

घर में इमली के पेड़ हैं उन पेड़ों में काफी फल लगते हैं। इमली के फल को पकने के बाद गिराते हैं और उसके बीज को निकालकर गूदा अलग किया जाता है। घर में उपयोग करने के लायक रखकर बाकी गूदा और बीज को बाजार में बेच दिया जाता है
मां घर में इमली के बीज निकालकर बेचने के लिए तैयार कर दी थी उसे मुझे बाज़ार में बेचना था। इमली गूदा और बीज दोनों को अलग-अलग लेकर मैं बाज़ार पहुंचा, कुछ लोग बताये थे चौक में बरगद पेड़ के आसपास दुकान में सही दाम लगाते हैं।
संबलपुर (भानुप्रतापपुर) साप्ताहिक बाजार में पहुंच कर मैं गाड़ी से उतरा और बरगद पेड़ के पास होटल के सामने लगे दुकान के दुकानदार से दाम पूछा उन्होंने जो दाम था वह बताया, मैं बेचने को राजी हो गया, चूंकि ऐसे बाजारों में कोचिए रुपी दुकानदार लोगों के थैले और बोरों को जबरदस्ती खींचते भी हैं और अपने दुकान में बेचने मजबूर करते हैं।
इमली का वजन 35 किलो 600ग्राम उनके इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन में आया । दुकानदार ने कहा 35 किलोग्राम हुआ। मैंने कहा – तौल में तो 35किलो 600ग्राम बताया है। फिर दुकानदार ने जवाब दिया – 600 ग्राम बोरा का काटते हैं। मैंने फिर कहा – ये तो प्लास्टिक बोरी है इसका वजन इतना कैसे होगा? तो मेरे से भी पतले दुकानदार ने कमाल का जवाब दिया, कहा- यहां मंडी वालों ने ये तय किया है।

……. काफी जद्दोजहद के बाद वे मुझे बाकी पैसे दिए। मैं सोचने लगा “जब हमारे साथ ऐसा होता है तो बाकी लोगों के साथ ये लोग कैसे व्यवहार करते होंगे? कैसा हिसाब – किताब करते होंगे?
….. *एक और वाक्या उसी संबलपुर में हुई। मैं एक दुकान के किनारे लगी कुर्सी में बैठा हुआ था, वहां और भी लोग बैठे हुए थे दुकानदार के अलावा मुझे कोई पहचानते नहीं थे। अधिकांश युवा थे, वे आपस में बाजार पर ही चर्चा कर रहे थे। सभी वस्तुओं के दाम और खरीदने के तरीकों के बारे में अपने-अपने अनुभव बता रहे थे, मैं चुपचाप अखबार लेकर पढ़ते हुए उनकी बातों को सुन रहा था।
…….. उनमें से एक युवा कोचिए ने अपना अनुभव बताते हुए कहा – अरे यार, बाजार करने में बहुत मजा आता है, लोगों के अमचूर को देखकर उसके रंग बताकर उसकी कीमत कम बता देना है थोड़ा साफ रंग का अमचूर का कीमत अधिक देना है। और जब बाजार से वापसी होती है तो सब अमचूर को एक साथ मिला देना है। सबका दाम एक बराबर हो जाता है।
….. मैं यह सुनकर हैरान रह गया कि कैसे आज भी बाजार में मेहनतकश लोग लूटे जा रहे हैं, उनके मेहनत का वाजिब दाम उनको नहीं मिल पाता है। मजबूरी में वे अपनी वस्तुओं को दुकानदार के तय कीमत पर बेच देते हैं।
…… चिरौंजी के बदले नमक देकर लूटने की व्यवस्था बदस्तूर जारी रहेगी या रुकेगी ? कहां प्रति किलो चिरौंजी 900-1000 और नमक 5-10 रुपये किलोग्राम।
ऐसे असमान विनिमय व्यवस्था को रोककर ही बस्तर के विकास मॉडल पर चर्चा आगे बढ़ सकेगी। ..... कहां है मंडी बोर्ड, मची है लूट-खसोट ....... ......किसान और मजदूरों के हित संरक्षण के नाम पर तनख्व़ाह खाने वाले मंडी बोर्ड के लोग कब जागेंगे? ......
टीप-: संबलपुर में ही कृषि उपज मंडी समिति का मुख्यालय है।
लेख -: ललित नरेटी
