छत्तीसगढ़

आत्मसम्मान और न्याय की आस में पीड़ित दंपत्ति पहुंचे राज्यपाल के दरबार

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गरियाबंद में होली के दिन 4 मार्च को नजदीकी गांव बारुला में हुई मारपीट की घटना और इस घटना के बाद पुलिसिया कार्यवाही पर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। बारुला के पीड़ित पति-पत्नी नंदकुमार यादव और ममता किरण यादव इस घटना के बाद बेहद अपमानित और प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं। न्याय और आत्मसम्मान की उम्मीद में वे राजधानी रायपुर के हर उच्चाधिकारियों और संभावित दरवाजे तक पहुंच रहे हैं। पीड़ित पति-पत्नी ने ठान लिया है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता, वे अपना पूरा प्रयास करते रहेंगे। इसके लिए जितनी मशक्कत करनी पड़े, वे तैयार हैं।

पूरी घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार 4 मार्च को ग्राम बारुला में दो पक्षों के बीच नगाड़ा बजाने को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया था। महिला ममता किरण यादव के अनुसार उसके और उसके पति के साथ तीन-चार लोगों ने मारपीट की, गालियां दीं, और सरे-राह अपमानित किया गया। किंतु थाने में सिर्फ एक व्यक्ति के विरुद्ध मामूली धाराओं में एफआईआर दर्ज कर मामला रफा-दफा कर दिया गया। एफआईआर में रसूखदारों का नाम छोड़ दिया गया। बार-बार उन रसूखदारों के नाम एफआईआर में शामिल किए जाने की उनकी मांग पर, थाना प्रभारी ओम प्रकाश यादव द्वारा थाने से भगाने की धमकी दी गई। पीड़ित महिला ममता किरण यादव का कहना है कि पुलिस थाने में कार्रवाई के नाम पर केवल मनमानी की गई। मामले में शामिल तथाकथित जनप्रतिनिधियों को सम्मानपूर्वक बिठाया गया, और उन्हें अपमानित किया जाता रहा। इतना ही नहीं आगे चलकर जनपद अध्यक्ष सोहन ध्रुव की शिकायत पर नंदकुमार यादव और अन्य तीन के विरुद्ध षड्यंत्रपूर्वक एट्रोसिटी एक्ट में मामला दर्ज कर लिया गया और उन्हें जेल भेज दिया गया। संभवतः इसी एट्रोसिटी धारा का भय दिखाकर और पीड़ितों को दहशत में डालकर 10,000 रुपयों की वसूली की गई। जब इस लेन-देन का मामला मोबाइल में रिकॉर्ड हुआ और ऑडियो वायरल हुआ तब एसआई अजय सिंह को सस्पेंड कर डैमेज कंट्रोल की कोशिश की गई। 4 मार्च की घटना के बाद महिला ने तुरंत 6 मार्च 2026 को पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर उचित कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस अधिकारियों की सीधी मिली भगत का उदाहरण यह है कि ममता किरण के इस शिकायती पत्र पर जांच का जिम्मा उसी एसआई अजय सिंह को सौंपा गया, जिसे आगे चलकर इस मामले में निलंबित किया गया। महिला का आरोप है कि जांच के नाम पर खानापूर्ति की गई। पुलिस थाने के टेबल में बैठकर तैयार किया गया मनगढंत जांच प्रतिवेदन उन्हें लगभग दो माह बाद 9 मई 2026 को प्राप्त हुआ, जिसके बाद पति-पत्नी ने माननीय राज्यपाल और डीजीपी के समक्ष अपनी फरियाद प्रस्तुत की है। पीड़ित नंदकुमार यादव का कहना है कि पूरे मामले में थाना प्रभारी ओम प्रकाश यादव, एक हवलदार और सब-इंस्पेक्टर अजय सिंह की भूमिका संदिग्ध रही है। उनके विरुद्ध उचित कार्रवाई की जानी चाहिए, साथ ही घटना में शामिल अन्य आरोपियों के विरुद्ध भी कार्रवाई की जानी चाहिए।

गरियाबंद से भूमकाल संवाददाता किरीट ठक्कर की रिपोर्ट

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