छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग परीक्षा- 2003 के भ्रष्टाचार का अंतिम निर्णय केवल सुप्रीम कोर्ट में होगा

fed446a6 4b7c 4f60 a3a0 bd28d9b1837c

लगभग 20 वर्ष पूर्व वर्ष 2006 में हम सभी याचिकाकर्ताओं कु. वर्षा डोंगरे, संतोष कुमार कुंजाम, चमन सिन्हा और रविन्द्र सिंह ने मिलकर छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग परीक्षा- 2003 के अनियमितता एवं भ्रष्टाचार विरूद्ध न्याय प्राप्ति हेतु रिट याचिका क्रमांक- 4028/ 2006 व अन्य प्रकरण दायर किये थे।

लगभग 8 वर्षों तक वकीलों के द्वारा प्रकरण की पैरवी की गई। आर्थिक परेशानियों एवं प्रकरण के संबंध अस्पष्ट जानकारी होने के कारण वर्ष 2013 से हाईकोर्ट के निर्णय दिनांक- 26.08.2016 तक हम सभी याचिकाकर्ता अपने अपने प्रकरणों की पैरवी किए।

माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर छत्तीसगढ़ में कुल 13 जजों में से 11 जजों ने हमारे प्रकरण की पैरवी कोई टेक्निकल समस्या होने के कारण सुवाई करने से ही इंकार कर दिए थे। शेष 02 जज सुनवाई नहीं कर रहे थे। ऐसी विकट परिस्थितियों में हमने एक एप्लिकेशन कोर्ट में फाईल कर हमारा प्रकरण उच्च न्यायालय जबलपुर मध्य प्रदेश में स्थानांतरण करने के लिए निवेदन किए। बहुत कठिनाइयों के मध्य केश की सुनवाई प्रारंभ हुई।

कोर्ट के बाहर भी अवैधानिक रूप से केश के सेटलमेंट का प्रयास प्रतिवादियों द्वारा किया गया, किंतु वे असफल रहे। माननीय न्यायालय कक्ष में उत्तरवादीगण के वकीलों ने बहुत से कानूनी दांव पेच, षडयंत्र,साम-दाम-दंड-भेद सभी तरीका आजमाकर हमें तोड़ने के साथ ही सुलह करने का असफल प्रयास किया गया। जबकि हममें से किसी भी याचिकाकर्ता के द्वारा कानून की पढ़ाई नहीं की गई थी। कुछ साथी सुलह को तैयार भी हो गए थे।

हमारा और संतोष जी का स्पष्ट अभिमत था कि हमें पद मिले न मिले, लेकिन जड़ से ही खराब हो चुके सिस्टम में सुधार के लिए न्याय प्राप्ति हेतु अंत तक डटे रहेंगे और फ़तह हासिल करके रहेंगे।

अंतत: अथक परिश्रम के पश्चात श्री दीपक गुप्ता, मुख्य न्यायाधीश, माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर छत्तीसगढ़ द्वारा 02 माह की नियमित सुनवाई पश्चात दिनांक- 26.08.2026 को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग परीक्षा- 2003 के भ्रष्टाचार के विरूद्ध हमारे पक्ष में निर्णय दिया गया। जिसमें यह उल्लेख किया गया कि उक्त परीक्षा में ” टाप टू बाटम ” भ्रष्टाचार हुआ है और हमारे केश में तो परीक्षा के हर स्तर पर ईरादतन अनियमितता की गई है।

माननीय न्यायालय द्वारा निर्णय के पैरा नंबर 69 में यह स्पष्ट रूप से उल्लेखित किया गया कि- छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग एवं राज्य सरकार द्वारा कोर्ट के समक्ष हमें ASP with Notional Promotion के साथ ही 11 वर्षों का पूरा वेतन देने का आफर दिया गया, जिसे न्यायहित में हमने ठुकरा दिया। जिस पर कोर्ट द्वारा गंभीर एवं तल्ख टिप्पणी भी की गई।

माननीय उच्च न्यायालय के फैसले का पालन राज्य सरकार द्वारा नहीं किया गया और प्रतिवादीगण माननीय सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर किए और स्टे आर्डर प्राप्त किए। चुंकि हमें भी माननीय हाईकोर्ट से न्याय प्राप्त नहीं हुआ था इसलिए वर्ष 2017 में मेरे और संतोष कुमार कुंजाम द्वारा भी माननीय सुप्रीम कोर्ट में एस एल पी दायर किया गया है जो कि लगभग 10 वर्षों से लंबित है और हम सब न्याय की प्रतिक्षा में खड़े हैं।

जब हमें लोक अदालत में इस गंभीर प्रकरण के सुलह के संबंध में आवश्यक कार्यवाही हेतु सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी नोटिस की जानकारी मित्रों से प्राप्त हुआ तो हमें बहुत खेद हुआ कि माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा इतने गंभीर प्रकरण, जिसमें स्वयं हाईकोर्ट द्वारा छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग परीक्षा- 2003 एवं राज्य सरकार के भ्रष्टाचार को प्रमाणित करते हुए गंभीर तल्ख टिपण्णियों के साथ निर्णय दिया गया है एवं विगत 20 वर्षों से माननीय न्यायालय में न्याय प्राप्ति हेतु लंबित है, को लोक अदालत में सुलह के लायक समझा…!!!

हमारा आज भी स्पष्ट अभिमत है कि-

न तो पहले हमने कोर्ई आफर स्वीकार किया था, न ही अब करेंगे।

अन्याय और अत्याचार के खिलाफ इस कानूनी लड़ाई का अंतिम निर्णय केवल सुप्रीम कोर्ट में ही होगा।

इस प्रकरण में हमें पद, पैसा या प्रतिष्ठा कुछ नहीं चाहिए…केवल न्याय चाहिए। यदि न्याय के तराजू में हमें लोक सेवा का अवसर मिलता है तो स्वीकार्य होगा अन्यथा नहीं।

राज्य सरकार से हमें कभी भी न्याय नहीं मिला इसलिए माननीय न्यायालय जाना पड़ा। भाजपा सरकार के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग परीक्षा – 2003 के भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया और उस भ्रष्टाचार के चयनित अधिकारियों को कांग्रेस सरकार के द्वारा प्रमोशन देकर IAS and IPS Award से सम्मानित कर यह अभिप्रमाणित कर दिया गया कि इस सिस्टम को केवल भ्रष्ट सेवक ही चाहिए…न कि ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ सेवक।

इस पोस्ट को लिखने से मेरा एकमात्र अभिप्राय यह है कि हमारा अभिमत स्पष्ट है। अन्याय के विरूद्ध न्याय प्राप्ति के इस संघर्ष में हम तब तक डटे रहेंगे, जब तक फ़तह हासिल न हो जाऐ।

उलगुलान जारी रहेगा

जय सेवा, जय संविधान, जय भारतवर्ष

साभार : Varsha Santosh Kunjam जी की वाल से

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *