परिवार ट्रेन में, महिला प्लेटफॉर्म पर छूटी… ट्रेन रुकवाने वाले रेलवे अफसर को RPF ने घसीटा!

भूमकाल समाचार | विशेष
आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर हुई घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर ड्यूटी पर तैनात डिप्टी स्टेशन अधीक्षक नरेंद्र सिंह चाहर ने कथित तौर पर एक महिला यात्री की सुरक्षा के लिए ट्रेन रुकवाई, वहीं दूसरी ओर उन पर आरपीएफ कर्मियों द्वारा मारपीट और घसीटने का आरोप सामने आया है।
घटना के बाद महिला यात्री रंजीता राव का बयान सामने आया है। उनके अनुसार, उनके पैर में पहले से चोट थी। पेठा खरीदते समय ट्रेन चल पड़ी तो वह चढ़ नहीं सकीं। उनका बच्चा और सामान ट्रेन में ही था। ऐसे में डिप्टी स्टेशन अधीक्षक ने गार्ड को सूचना देकर ट्रेन रुकवाई।
महिला का आरोप है कि इसके बाद पहुंचे आरपीएफ जवानों ने न केवल रेलवे अधिकारी से मारपीट की, बल्कि उन्हें और अधिकारी को झूठे मुकदमे में फँसाने की धमकी दी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनसे ₹1000 लिए गए, लेकिन कोई रसीद नहीं दी गई।
यदि ये आरोप सही हैं, तो सवाल बेहद गंभीर हैं—
क्या एक अधिकारी द्वारा यात्री की सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम अपराध था?
क्या वर्दी का इस्तेमाल कानून लागू करने के लिए हुआ या ताकत दिखाने के लिए?
महिला से कथित ₹1000 किस आधार पर लिए गए? यदि जुर्माना था तो रसीद कहाँ है?
क्या पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी?
रेलवे और आरपीएफ जैसी संस्थाओं से यात्रियों को सुरक्षा और संवेदनशील व्यवहार की अपेक्षा रहती है। इसलिए इस मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि तथ्य सामने आएं और यदि किसी स्तर पर अधिकारों का दुरुपयोग हुआ है तो जवाबदेही तय हो।
