छत्तीसगढ़

थाने के भीतर पत्रकार से मारपीट का आरोप, जशपुर में पुलिस की भूमिका पर उठे सवालपत्थलगांव (जशपुर)

भूमकाल समाचार विशेष
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के गृह जिले जशपुर के पत्थलगांव में एक पत्रकार के साथ कथित मारपीट की घटना ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था और प्रेस की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्रकार अमित पांडेय का आरोप है कि उन्हें थाने बुलाए जाने के बाद पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट की, जबकि पुलिस ने उन्हें बचाने के बजाय मूकदर्शक की भूमिका निभाई।


पीड़ित पक्ष का दावा है कि पत्रकार लंबे समय से कथित भूमि घोटालों, फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन कब्जाने और अन्य अवैध गतिविधियों से जुड़े मामलों पर रिपोर्टिंग कर रहे थे। इसी कारण उन्हें लगातार दबाव और धमकियों का सामना करना पड़ रहा था।
घटना के बाद पत्रकार संगठनों और नागरिकों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि किसी पुलिस थाने के भीतर ही पत्रकार सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा की क्या स्थिति होगी।


मामले में स्थानीय SDOP ध्रुवेश जायसवाल की भूमिका को लेकर भी कई सवाल उठाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर यह मांग तेज हो रही है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा यदि किसी पुलिस अधिकारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।


विपक्ष की ओर से भी इस मामले पर अपेक्षित मुखर प्रतिक्रिया नहीं आने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वहीं प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़े संगठनों का कहना है कि यदि पत्रकारों पर हमलों के मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो इसका लोकतंत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
भूमकाल समाचार मांग करता है कि—
घटना की न्यायिक या स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए।
थाने के सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक किए जाएं।


दोषी पाए जाने वाले सभी व्यक्तियों और अधिकारियों पर निष्पक्ष कार्रवाई हो।
पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए ताकि वे बिना भय के जनहित के मुद्दे उठा सकें।

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