सैप्टिक टैंक में मिले पत्रकार मुकेश चंद्राकर के मामले में चार गवाहों ने अदालत में दिए महत्वपूर्ण बयान

दंतेवाड़ा@ दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा के प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश मोहन प्रसाद गुप्ता की अदालत में लंबित प्रकरण में 05 मई 2026 को चार प्रमुख गवाहों ने अपनी गवाही दर्ज कराई। इस मामले में मुख्य आरोपी सुरेश चंद्राकर, उसके भाई रितेश चंद्राकर व दिनेश चंद्राकर तथा मुंशी महेंद्र रामटेके उर्फ छोटू पर पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या कर उनके शव को सीप्टिक टैंक में फेंकने का आरोप है।
गवाहों के मुख्य बयान:
गवाह नंबर 05 – भाईलाल पटेल (28 वर्ष, सुपरवाइजर):
भाईलाल पटेल ने बताया कि वे लंबे समय तक सुरेश चंद्राकर के यहां काम कर चुके हैं। 1 जनवरी 2025 को चित्रकोट पिकनिक के बाद शाम को कोड़ेनार के पास रितेश चंद्राकर मिला। रितेश ने लक्ष्मण को पेट्रोल डलवाने के लिए 2000 रुपये दिए और कहा कि वे नैमेड़ में मिलेंगे। बाद में दिनेश चंद्राकर ने उन्हें बीजापुर लौटने को कहा। दूसरे दिन सुबह उन्होंने दिनेश चंद्राकर को अजाक्स (कांक्रीट मिक्सर मशीन) चलाते देखा और बाद में मामा बाड़ा में सैप्टिक टैंक की ढलाई का काम चलता देखा।
गवाह नंबर 04 – रितेश यादव (27 वर्ष, मजदूर):
रितेश यादव ने बताया कि वे सुरेश चंद्राकर के गिट्टी गोदाम (85 बटालियन के सामने) आरोपी सुरेश चंद्राकर के गिट्टी गोदाम में रहते थे। 1 जनवरी 2025 की रात करीब 12 बजे दिनेश चंद्राकर, रितेश चंद्राकर और महेंद्र रामटेके बोलेरो से आए। उन्होंने सीमेंट और पानी के ड्रम पिकअप में रखा और बोलेरो वाहन को वही छोड़ दिया। दूसरे दिन सुबह 6 बजे उन्हें बताया गया कि रात 3 बजे आरोपी लोग आए थे। उन्होंने सैप्टिक टैंक की ढलाई का काम भी देखा।
गवाह नंबर 03 – सरस्वती चालकी (22 वर्ष, सिलाई कार्य):
सरस्वती चालकी मामा बाड़ा में कमरा नंबर 13 में रहती थीं और सुरेश चंद्राकर ठेकेदार के यहाँ खाना बनाने का काम करती है। उन्होंने बताया कि 1 जनवरी 2025 की शाम को रितेश चंद्राकर ने फोन कर बैडमिंटन नेट हटाने को कहा। रात 9 बजे उजन्ती के फोन करने पर बाहर निकलीं तो कमरा नंबर 11 के बाहर रितेश चंद्राकर खड़े थे और एक वैन खड़ी थी। कमरे के अंदर से चीखने-चिल्लाने और धड़ाम-धड़ाम की आवाजें आ रही थीं। उन्होंने उजन्ती को भी ये आवाजें सुनाई थीं। रात भर तोड़-फोड़ की आवाजें आती रहीं।
गवाह नंबर 02 – उजन्ती साहू (23 वर्ष, गृहिणी):
उज्जंती साहू ने सबसे विस्तृत बयान दिया। उन्होंने बताया कि रात करीब 8:30 बजे कमरा नंबर 11 से किसी के चिल्लाने और “एक बार बात तो कर ले” कहने की आवाज आई। बाद में सरस्वती के साथ टॉयलेट जाने पर उन्होंने खुद रितेश चंद्राकर को कमरे के बाहर और एक वैन खड़ी देखी। रात भर डर के मारे दोनों सो नहीं पाईं। सुबह 6 बजे महेंद्र रामटेके आए और कहा कि पानी की दिक्कत दूर कर देंगे तथा सैप्टिक टैंक की ढलाई करवा देंगे। सुबह 8-8:30 बजे दिनेश चंद्राकर और महेंद्र ने मिस्त्रियों के जरिए सैप्टिक टैंक की ढलाई करवा दिए।
मामले की पृष्ठभूमि:
03 जनवरी 2025 को मामा बाड़ा स्थित सैप्टिक टैंक से पत्रकार मुकेश चंद्राकर का शव बरामद किया गया था। आरोपियों पर हत्या के बाद सबूत मिटाने के लिए सैप्टिक टैंक में शव डालकर उसकी ढलाई करवाने का गंभीर आरोप है। सभी गवाहों ने पुलिस व मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बयानों को आज अदालत में दोहराया।
अदालत में हुई कार्यवाही:
प्रतिरक्षा पक्ष के अधिवक्ताओं (सावन ठाकुर, सुमित मिश्र आदि) ने गवाहों के क्रॉस-एग्जामिनेशन को स्थगित कराने का अनुरोध किया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। अदालत ने शर्त रखी कि यदि भविष्य में गवाह की मृत्यु हो जाती है या वह अदालत की पहुंच से बाहर चला जाता है तो बिना क्रॉस-एग्जामिनेशन के भी यह गवाही मान्य होगी।
यह मामला स्थानीय स्तर पर काफी संवेदनशील है क्योंकि पीड़ित मुकेश चंद्राकर एक पत्रकार थे। अगली सुनवाई में शेष गवाहों की गवाही और क्रॉस-एग्जामिनेशन होने की संभावना है।
नोट: यह रिपोर्ट अदालत में दर्ज गवाहियों पर आधारित है। मामले की सुनवाई चल रही है और आरोपियों पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
प्रभात सिंह
