क्या यही है विकास का नया मॉडल?

पत्रकारों पर प्रहार: खबर दिखाने पर एक नहीं, चार-चार मामले दर्ज? आखिर सच की आवाज दबाने की इतनी जल्दबाजी क्यों?
बुजुर्गों का अपमान: एक 63 वर्षीय व्यक्ति और उनके पूरे परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना, क्या यह वीरता की श्रेणी में आता है?
पुलिसिया खौफ: पुलिस का काम सुरक्षा देना है, लेकिन यहाँ ‘दबंगई’ और ‘गुंडागर्दी’ का आलम है। हर रोज धमकियाँ और प्रताड़ना… क्या यह सुशासन की परिभाषा है?
माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव सायं जी और गृहमंत्री श्री विजय शर्मा जी,
प्रदेश की जनता और पत्रकार जगत आपसे यह पूछना चाहता है कि क्या यही वह सुशासन है जिसका वादा किया गया था? प्रदेश की जनता प्रताड़ना नहीं, सुरक्षा चाहती है। पत्रकारों को ‘टारगेट’ करना बंद कीजिए और कानून व्यवस्था को सच में दुरुस्त कीजिए।
“कलम को जंजीरों में बांधकर आप व्यवस्था को नहीं सुधार सकते, सिर्फ अपनी कमियों को छिपा सकते हैं।”
निवेदन है कि सत्ता के अहंकार को छोड़कर जनता के दर्द पर मरहम लगाइए। पत्रकारों की प्रताड़ना तुरंत बंद हो!
