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BJP युवा मोर्चा पदाधिकारी सूरज पाटिल के पास मिले 3,404 असली SIR फॉर्म

नवी मुंबई में मतदाता सूची के ‘खेल’ का खुलासा? 5 BLO निलंबित, FIR दर्ज—SIR को लेकर देशभर में उठ रहे सवालों के बीच बड़ा सवाल

भूमकाल समाचार | विशेष रिपोर्ट

नवी मुंबई। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर देशभर में चल रही बहस के बीच महाराष्ट्र के नवी मुंबई से सामने आया मामला चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

BJP युवा मोर्चा के पदाधिकारी सूरज पाटिल के पास 3,404 असली SIR Enumeration Forms पाए गए। ये फॉर्म पनवेल विधानसभा क्षेत्र के 11 मतदान केंद्रों से संबंधित थे और इनमें मतदाताओं की फोटो, निजी जानकारी तथा BLO के आधिकारिक हस्ताक्षर मौजूद थे। मामले में पांच BLO निलंबित किए गए हैं और सूरज पाटिल के खिलाफ FIR दर्ज हुई है। �

The Indian Express +1

सरकारी मतदाता फॉर्म BJP पदाधिकारी तक पहुंचे कैसे?

यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है।

चुनाव आयोग की प्रक्रिया में मतदाताओं से भरे गए इन फॉर्मों की जिम्मेदारी BLO की होती है। फिर 3,404 मूल सरकारी फॉर्म एक निजी फोटो कॉपी सेंटर तक कैसे पहुंचे और वहां से BJP युवा मोर्चा से जुड़े सूरज पाटिल के हाथ में कैसे आए?

रिपोर्टों के मुताबिक अधिकारियों ने फॉर्मों को असली और BLO की जिम्मेदारी वाले दस्तावेज पाया। इसी के बाद पांच BLO पर कार्रवाई हुई और पाटिल के खिलाफ कानूनी मामला दर्ज किया गया। �

The Economic Times

कुछ रिपोर्टों में पुलिस सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया है कि CCTV फुटेज में BLO द्वारा फॉर्म फोटो कॉपी सेंटर तक पहुंचाए जाने की जांच की जा रही है। �

Mumbai Mirror

मामला नवी मुंबई तक सीमित नहीं

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पश्चिम बंगाल, असम, दिल्ली और पंजाब सहित कई राज्यों में SIR के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।

ऐसे माहौल में नवी मुंबई के 3,404 मूल SIR फॉर्मों का एक राजनीतिक दल के युवा मोर्चा पदाधिकारी तक पहुंचना सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही मानकर छोड़ देने का मामला नहीं हो सकता।

यह पता लगना चाहिए कि—

फॉर्म किसने दिए?

किसके निर्देश पर दिए?

फोटोकॉपी क्यों कराई जा रही थी?

किसके लिए कराई जा रही थी?

और 3,404 मतदाताओं की निजी जानकारी आखिर किसके पास पहुंची?

भूमकाल समाचार का सवाल

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SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना है या चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने का रास्ता बनाना?

अगर चुनाव आयोग की निगरानी में तैयार होने वाले हजारों मूल मतदाता फॉर्म किसी राजनीतिक दल से जुड़े पदाधिकारी के पास पहुंच सकते हैं, तो देशभर में चल रही SIR प्रक्रिया की सुरक्षा और निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

नवी मुंबई की घटना की जांच सिर्फ पांच BLO के निलंबन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।

जांच यह भी बताए कि सूरज पाटिल तक 3,404 फॉर्म कैसे पहुंचे और इस पूरी प्रक्रिया के पीछे कौन-कौन लोग थे।

क्योंकि मतदाता सूची में हेरफेर का सवाल सिर्फ कागज का सवाल नहीं है—

यह सीधे नागरिक के वोट और लोकतंत्र के अधिकार का सवाल है।

— भूमकाल समाचार

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