25 साल बाद फिर शुरू हुआ बस्तर में कोरंडम खनन, अब कटिंग-पॉलिशिंग से ‘बस्तर ब्रांड’ बनाने की तैयारी
CMDC और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के बीच समझौता, स्थानीय युवाओं को रत्न कटिंग-पॉलिशिंग का प्रशिक्षण देने की योजना

रायपुर, 1 सितंबर 2026। बीजापुर जिले के भोपालपट्टनम क्षेत्र के कुचनूर में करीब 25 साल के अंतराल के बाद कोरंडम खनन दोबारा शुरू होने के बाद अब सरकार ने इसके स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन की दिशा में कदम बढ़ाया है। छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (CMDC) और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी में एमओयू हुआ है। विश्वविद्यालय को कोरंडम की कटिंग, पॉलिशिंग और रत्नों से जुड़े कौशल प्रशिक्षण के लिए नॉलेज पार्टनर बनाया गया है।
सरकार की योजना खदान से निकलने वाले कोरंडम को केवल कच्चे खनिज के रूप में बेचने के बजाय उसकी कटिंग-पॉलिशिंग, आभूषण निर्माण, ब्रांडिंग और मार्केटिंग तक की पूरी वैल्यू चेन विकसित करने की है। इसके लिए स्थानीय युवाओं, शिल्पकारों और संभावित उद्यमियों को प्रशिक्षण देने की बात कही गई है।
फरवरी 2025 से दोबारा शुरू हुआ खनन
कुचनूर में कोरंडम खदान का संचालन फरवरी 2025 से फिर शुरू किया गया है। इसके लिए CMDC और संयुक्त उपक्रम साझेदार मेसर्स एन.सी. नाहर के बीच गठित छत्तीसगढ़ कोरंडम माइन्स लिमिटेड के माध्यम से खनन किया जा रहा है।
सरकारी जानकारी के मुताबिक वर्तमान में खदान से निकाले गए कोरंडम का करीब 240 किलोग्राम भंडारण है। इनमें से 157.643 किलोग्राम कोरंडम का परिवहन किया जा चुका है। परिवहन किए गए खनिज में 107.989 किलोग्राम बी-ग्रेड और 49.654 किलोग्राम औद्योगिक ग्रेड कोरंडम बताया गया है।
स्थानीय युवाओं को रोजगार का दावा
कुचनूर खदान के संचालन से अब तक बीजापुर जिले के 14 स्थानीय युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर मिलने की जानकारी सरकार ने दी है। आगे खनिज आधारित गतिविधियों में स्थानीय समुदाय, स्वयं सहायता समूहों, शिल्पकारों और उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने की योजना है।
कच्चे खनिज से रत्न और आभूषण तक
सरकार कोरंडम की पहचान केवल औद्योगिक खनिज के रूप में नहीं, बल्कि मूल्यवान रत्न सामग्री के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। प्रस्तावित प्रशिक्षण में जेम्स्टोन हैंडलिंग, पहचान, कटिंग और पॉलिशिंग जैसी तकनीकों को शामिल किया जाएगा।
इसके पीछे उद्देश्य यह है कि बस्तर से निकलने वाले खनिज का अधिकतम आर्थिक मूल्य स्थानीय स्तर पर ही तैयार हो और इससे रोजगार के नए अवसर पैदा हों।
‘बस्तर ब्रांड’ के नाम से बाजार में उतारने की तैयारी
कुचनूर के कोरंडम से तैयार रत्न और आभूषणों को ‘बस्तर ब्रांड’ के तहत बाजार में लाने की योजना भी प्रस्तावित है। स्थानीय डिजाइन, गुणवत्ता और प्रमाणिकता को इसके साथ जोड़ने की बात कही गई है।
यदि यह योजना जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू होती है तो बस्तर की खनिज संपदा को स्थानीय कला और शिल्प से जोड़कर नए बाजार तैयार किए जा सकते हैं।
अन्य क्षेत्रों में भी कोरंडम की तलाश
बीजापुर जिले में कोरंडम के संभावित नए क्षेत्रों की पहचान और अन्वेषण का काम भी जारी है। भोपालपट्टनम क्षेत्र में कुचनूर के अलावा अन्य संभावित क्षेत्रों को चिन्हित किया जा रहा है। धनगोल समेत विभिन्न इलाकों में क्षेत्र आरक्षित करने और आवेदन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की जानकारी भी सरकार ने दी है।
सरकार का दावा है कि खनन से लेकर मूल्य संवर्धन और बाजार तक पूरी श्रृंखला विकसित होने से राज्य को राजस्व मिलेगा और बस्तर के कोरंडम को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने की संभावना बढ़ेगी।
