मुकेश चंद्रकर हत्याकांड: भाई युकेश का बयान-लैपटॉप के फाइंड माई डिवाइस में अंतिम फोन लोकेशन से शव मिला

दंतेवाड़ा: बस्तर जंक्शन यू-ट्यूब चैनल चलाने वाले और एनडीटीवी के संवाददाता रहे पत्रकार मुकेश चंद्रकर की हत्या के मामले में उनके बड़े भाई युकेश चंद्रकर (38) ने मंगलवार (24 जुलाई 2026) को दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा के प्रथम अपर सेशन न्यायालय में अपना बयान दर्ज कराया।
युकेश चंद्रकर ने मुख्य परीक्षा में बताया कि वे आरोपी रितेश चंद्रकर, दिनेश चंद्रकर, सुरेश चंद्रकर और महेंद्र रामटेके उर्फ छोटू को अच्छी तरह जानते-पहचानते हैं। रितेश और दिनेश, सुरेश के भाई हैं, जबकि महेंद्र सुरेश के यहां काम करता है।
उन्होंने कहा कि 1 जनवरी 2025 की शाम करीब 6:00-6:30 बजे उन्होंने आखिरी बार मुकेश से आमने-सामने बात की थी। नववर्ष की शुभकामनाएं देकर वे अपने कमरे में सोने चले गए। दोनों भाई किराये के एक ही मकान में अलग-अलग कमरों में रहते थे।
2 जनवरी की सुबह उन्होंने अपने 13 वर्षीय बेटे आर्यांश को मुकेश के कमरे में भेजा। बेटा लौटकर बोला कि मुकेश कमरे में नहीं हैं। बाद में करीब 9:00-9:30 बजे युकेश खुद गए, फिर मुकेश के मोबाइल नंबर 9399801533 पर फोन किया, लेकिन नंबर बंद या कवरेज से बाहर था। दोपहर में बड़े भाई पुरुषोत्तम चंद्रकर के कहने पर वे बासागुड़ा जाने निकले। रास्ते में बार-बार फोन लगाने के बावजूद मुकेश का फोन नहीं लगा।
युकेश ने बताया कि उन्होंने आरोपी रितेश चंद्रकर को भी फोन किया। रितेश ने कहा कि वह मुकेश से 3-4 दिन पहले मिला था, लेकिन बातचीत से ऐसा लग रहा था कि 1-2 दिन से नहीं मिला। एनडीटीवी के राज्य ब्यूरो निलेश त्रिपाठी ने बताया कि रितेश 1 जनवरी को मुकेश को लेने उसके कमरे में आने वाला था।
बाद में मुकेश के लैपटॉप से ‘फाइंड माय डिवाइस’ के जरिये मोबाइल का अंतिम लोकेशन आरोपी सुरेश चंद्रकर के मामा बाड़ा (जहां मजदूर रहते थे) दिखा। संदेह होने पर युकेश ने थाना बीजापुर में गुमशुदगी की लिखित शिकायत दी। 3 जनवरी 2025 की शाम को मुकेश का शव उसी मामा बाड़ा के सेप्टिक टैंक से बरामद हुआ। शव पर सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में चोट के निशान थे।
युकेश ने बताया कि सुरेश चंद्रकर सड़क निर्माण का ठेकेदार है। गंगालूर-नेलसनार सड़क ठेके में भ्रष्टाचार की खबर एनडीटीवी पर छपने के बाद शासन ने जांच टीम गठित की थी।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता श्री यू.बी. पांडे द्वारा गवाह का प्रतिपरीक्षण किया गया।युकेश ने स्वीकार किया कि वे और मुकेश दोनों पत्रकार थे, मुकेश बस्तर जंक्शन चैनल चलाते थे और एनडीटीवी में रिपोर्टिंग भी करते थे। उन्होंने कहा कि सड़क भ्रष्टाचार वाली खबर मुकेश ने नहीं लिखी थी। पत्रकारों को कभी-कभी जान जोखिम में डालकर काम करना पड़ता है और मोबाइल स्विच ऑफ भी रखना पड़ता है, लेकिन आमतौर पर लंबे समय तक ऑफ नहीं रखते।
न्यायालय (न्यायाधीश मोहन प्रसाद गुप्ता) ने समय समाप्त होने और प्रतिपरीक्षण प्रक्रिया लंबी होने के कारण प्रतिपरीक्षा स्थगित कर 25 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजे के लिए स्थगित कर दिया। बयान युकेश के बताए अनुसार लेखबद्ध किया गया, पढ़कर सुनाया गया और उन्होंने सही होना स्वीकार किया।
(यह रिपोर्ट अदालती बयान पर आधारित है।)
बीजापुर से प्रभात सिंह की रिपोर्ट
