स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव में सरकार ने खेल नीति का खाका रखा, उत्कृष्ट खेल मिशन के लिए ₹100 करोड़ का दावा

रायपुर, 28 जुलाई। छत्तीसगढ़ सरकार ने राजधानी रायपुर में पहली बार आयोजित स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव के समापन अवसर पर राज्य में खेल अधोसंरचना और खिलाड़ियों के विकास को लेकर अपनी प्राथमिकताओं का खाका प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने उत्कृष्ट खेल मिशन के लिए इस वर्ष के बजट में ₹100 करोड़ के प्रावधान की जानकारी देते हुए कहा कि खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए सरकार गंभीरता से काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों और टीमों को घोषित प्रोत्साहन राशि भी वितरित की। उन्होंने बताया कि राज्य के 156 उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सूची को मंजूरी दी गई है, जिन्हें भविष्य में सरकारी नौकरियों में लाभ देने की योजना है।
कॉन्क्लेव में देशभर से आए खेल प्रशासकों, नीति विशेषज्ञों, स्पोर्ट्स साइंटिस्ट, खिलाड़ियों और खेल संघों के प्रतिनिधियों ने छत्तीसगढ़ में खेल अधोसंरचना, प्रतिभा खोज, प्रशिक्षण व्यवस्था और दीर्घकालिक खेल नीति पर चर्चा की। उप मुख्यमंत्री एवं खेल मंत्री अरुण साव ने कहा कि कॉन्क्लेव से प्राप्त सुझावों के आधार पर राज्य की खेल नीति और कार्ययोजना को और प्रभावी बनाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि बस्तर ओलंपिक, सरगुजा ओलंपिक और खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसे आयोजनों के माध्यम से बड़ी संख्या में खिलाड़ियों को मंच मिला है। उनके अनुसार बस्तर ओलंपिक में लगभग चार लाख और सरगुजा ओलंपिक में साढ़े तीन लाख प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
19 पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में छत्तीसगढ़ ने 3 स्वर्ण, 10 रजत और 6 कांस्य सहित कुल 19 पदक हासिल किए थे। सरकार ने स्वर्ण पदक विजेता को ₹2 लाख, रजत पदक विजेता को ₹1.5 लाख और कांस्य पदक विजेता को ₹1 लाख की प्रोत्साहन राशि प्रदान की। वहीं महिला फुटबॉल टीम को ₹22 लाख, पुरुष फुटबॉल टीम को ₹16.5 लाख तथा पुरुष हॉकी टीम को ₹9 लाख की राशि दी गई।
कॉन्क्लेव में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, खेल विशेषज्ञों, पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों तथा सभी जिलों के खेल अधिकारियों ने भाग लिया।
(भूमकाल समाचार यह भी मानता है कि खेल अधोसंरचना, बजटीय प्रावधान और खिलाड़ियों को मिलने वाले रोजगार एवं सुविधाओं का वास्तविक असर आने वाले वर्षों में इनके प्रभावी क्रियान्वयन से ही स्पष्ट होगा।)
