खाकी का संरक्षण या पुलिस की नाकामी? हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद भी फरार ‘सट्टा किंग’ मनीष आसरानी, कांकेर में अब भी एक्टिव हैं गुर्गे!

कांकेर/रायपुर।
छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन सट्टेबाजी के खिलाफ जारी बड़ी कार्रवाई के बीच कांकेर का सबसे बड़ा सट्टा किंग मनीष आसरानी (निवासी मांझापारा) पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। रायपुर की सिविल लाइंस पुलिस द्वारा दर्ज गंभीर मामले (अपराध क्रमांक 561/2024) में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट बिलासपुर से अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) याचिका खारिज होने के बाद मनीष आसरानी आधिकारिक तौर पर फरार (Absconding) घोषित है। कोर्ट से किसी भी प्रकार की राहत न मिलने के बावजूद आरोपी का महीनों से फरार रहना अब कांकेर पुलिस की कार्यप्रणाली और उसे मिलने वाले कथित ‘मूक संरक्षण’ पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, मनीष आसरानी भले ही पुलिस की फाइलों में फरार है, लेकिन तकनीकी रूप से वह अब भी पूरी तरह सक्रिय है। वह लगातार अपने ठिकाने बदलकर अज्ञात जगहों से “Bet Only 777.com” और “Ganpati Book” जैसे अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन सट्टा पैनलों की आईडी और लाइंस सप्लाय कर रहा है। कांकेर में उसके गुर्गों का नेटवर्क आज भी बेखौफ होकर युवाओं को इस दलदल में धकेल रहा है।
हाईकोर्ट ने काटी बेल, फिर भी पुलिस के हाथ खाली
रायपुर पुलिस की कस्टडी में मौजूद सह-आरोपी अरुण कुमार यादव ने कबूला था कि इस पूरे सट्टा सिंडिकेट का मास्टरमाइंड मनीष आसरानी ही है। इस खुलासे के बाद जब पुलिस ने शिकंजा कसा, तो मनीष ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन माननीय उच्च न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उसकी अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज (Disposed) कर दिया। कानूनी सुरक्षा कवच हटने के बाद भी स्थानीय पुलिस द्वारा उसे गिरफ्तार न कर पाना कई तरह के संदेह पैदा करता है।
स्थानीय पुलिस प्रशासन के संरक्षण की बू?
मनीष आसरानी का आपराधिक इतिहास काफी पुराना है। अप्रैल 2022 में उसे आईपीएल सट्टेबाजी के दौरान 50 लाख रुपये से अधिक के ऑनलाइन हिसाब के साथ रंगे हाथों पकड़ा गया था। लेकिन जेल से छूटने के बाद उसने स्थानीय स्तर पर अपना ऐसा मजबूत रसूख और जाल तैयार किया कि पुलिस की कार्रवाई सुस्त पड़ गई। कांकेर के जागरूक नागरिकों का सीधा आरोप है कि मांझापारा और आस-पास संचालित होने वाली इसकी ‘सट्टा कोठरी’ और अवैध गतिविधियों की पल-पल की खबर स्थानीय पुलिस को है। इसके बावजूद किसी ठोस कार्रवाई का न होना और आरोपी का महीनों तक फरार रहना खाकी की साख पर बट्टा लगा रहा है।
केस स्टडी: सट्टे की लत में डूबा कांकेर का युवा वर्ग; पढ़ाई छूटी, कर्ज के दलदल में फंसे कई परिवार
सट्टा किंग मनीष आसरानी जैसे रसूखदार खाईवालों द्वारा फैलाए गए “Bet Only 777.com” और “Ganpati Book” जैसे ऑनलाइन ऐप्स के जाल ने कांकेर के शांत वातावरण को पूरी तरह दूषित कर दिया है। इस सिंडिकेट का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि इसकी सीधी मार स्थानीय कॉलेज छात्रों और मध्यमवर्गीय परिवारों के युवाओं पर पड़ रही है। ‘भूमकाल समाचार’ की पड़ताल में सामने आई कुछ बेहद चौंकाने वाली वास्तविक केस स्टडीज इस काले कारोबार की भयावहता को बयां करती हैं:
केस 1: कॉलेज ड्रॉपआउट और लाखों का कर्जकांकेर के मांझापारा के पास रहने वाले एक 21 वर्षीय कॉलेज छात्र को मनीष आसरानी के स्थानीय गुर्गों ने शुरुआत में “फ्री आईडी” और “वेलकम बोनस” का लालच देकर ऑनलाइन सट्टे की लत लगाई। महज 6 महीनों के भीतर वह छात्र 3 लाख रुपये से अधिक के कर्ज में डूब गया। अपनी कॉलेज की फीस और बाइक की किस्त के पैसे सट्टे में हारने के बाद, लेनदारों के दबाव में उसने पढ़ाई छोड़ दी। आज उसका पूरा परिवार कर्ज चुकाने के लिए अपनी पुश्तैनी जमीन बेचने पर मजबूर है।
केस 2: सुरक्षित भविष्य की जगह मिला ‘क्राइम’ का रास्ताएक अन्य मामले में, शहर के एक प्रतिष्ठित व्यापारी के बेटे को इस ऐप के जरिए रातों-रात अमीर बनने का चस्का लगा। जब वह अपनी जेबखर्ची हार गया, तो खाईवालों ने उसे डराना-धमकाना शुरू किया। दबाव में आकर उसने घर से ही सोने के जेवर चोरी करना शुरू कर दिया। जब घर वालों को इसकी भनक लगी, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस सिंडिकेट ने एक होनहार युवा को अपराधी की राह पर धकेल दिया।
खाईवालों का ‘लोन नेटवर्क’:सूत्रों के मुताबिक, मनीष आसरानी का यह नेटवर्क सिर्फ सट्टा नहीं खिलाता, बल्कि हारने वाले युवाओं को तुरंत ऊंची ब्याज दरों पर अवैध रूप से “सट्टा लोन” भी उपलब्ध कराता है। जब युवा यह रकम नहीं चुका पाते, तो उनके वाहनों को जब्त करना, घर पर जाकर गाली-गलौज करना और मानसिक रूप से प्रताड़ित करना इस गैंग का मुख्य हथियार बन जाता है। इसी डर और सामाजिक बदनामी के चलते कई युवा आत्मघाती कदम उठाने की कगार पर पहुंच रहे हैं।
पुलिस अधिकारी का बयान
“ऑनलाइन सट्टा और अवैध जुआ नेटवर्क के खिलाफ हमारी नीति बिल्कुल स्पष्ट है। सिविल लाइंस रायपुर में दर्ज मामले में मुख्य आरोपी मनीष आसरानी की अग्रिम जमानत याचिका कोर्ट से खारिज हो चुकी है । तकनीकी सर्विलांस के आधार पर उसकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। यदि स्थानीय स्तर पर किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा आरोपी को संरक्षण देने या सूचना लीक करने की बात सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। आरोपी जल्द ही सलाखों के पीछे होगा।”
— वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, पुलिस मुख्यालय
भूमकाल समाचार विशेष टिप्पणी
जब बिलासपुर हाईकोर्ट आरोपी की अर्जी खारिज कर चुका है , रायपुर पुलिस उसके गुर्गों को दबोच चुकी है, तो फिर कांकेर पुलिस को अपने ही इलाके के इस सट्टा किंग को ढूंढने में इतनी कठिनाई क्यों हो रही है? ‘भूमकाल समाचार’ जिला प्रशासन और गृह विभाग से सीधे पूछता है कि आखिर इस ‘फरार’ सट्टा किंग पर मेहरबानी का असली सूत्रधार कौन है? क्यों एक फरार मुल्जिम पूरे जिले के युवाओं का भविष्य सट्टे की आग में झोंक रहा है और जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं?
