काजीरंगा में जल, जंगल और ज़मीन की लड़ाई के बीच एक्टिविस्ट प्रणव डोले गिरफ्तार, नागरिक संगठनों ने उठाए सवाल

भूमकाल समाचार | गुवाहाटी/बोकाखाट
असम के काजीरंगा क्षेत्र में आदिवासी समुदायों के भूमि अधिकार और कथित भूमि अधिग्रहण के खिलाफ लंबे समय से सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता प्रणव डोले को रविवार को गुवाहाटी से पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उनकी गिरफ्तारी के बाद विभिन्न सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने विरोध दर्ज कराते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है।
प्रणव डोले ग्रेटर काजीरंगा लैंड एंड ह्यूमन राइट्स प्रोटेक्शन कमेटी (GKLHRPC) के संयोजक हैं। वे पिछले कई वर्षों से काजीरंगा नेशनल पार्क के आसपास प्रस्तावित लक्ज़री होटल परियोजनाओं तथा स्थानीय आदिवासी और चाय-जनजाति समुदायों की कृषि भूमि के कथित अधिग्रहण का विरोध करते रहे हैं। हाल के महीनों में उन्होंने आरोप लगाया था कि इंग्ले पाथर क्षेत्र की कृषि भूमि को पर्यटन परियोजनाओं के लिए हस्तांतरित किया जा रहा है, जबकि प्रभावित परिवार अपने पारंपरिक भूमि अधिकारों का दावा कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, डोले की गिरफ्तारी बोकाखाट पुलिस थाने में दर्ज एक मामले के संबंध में की गई है। हालांकि, इस मामले में पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
काजीरंगा क्षेत्र में भूमि को लेकर विवाद नया नहीं है। पिछले वर्ष भी भूमि अधिकार आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ताओं और प्रभावित ग्रामीणों के साथ कथित मारपीट, हिरासत और तनाव की घटनाएं सामने आई थीं। कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी इन घटनाओं पर चिंता व्यक्त की थी।
उल्लेखनीय है कि प्रणव डोले केवल सामाजिक कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि बोकाखाट विधानसभा क्षेत्र से चुनाव भी लड़ चुके हैं। उनकी पहचान आदिवासी अधिकार, भूमि संरक्षण और पर्यावरणीय मुद्दों पर सक्रिय जननेता के रूप में रही है।

गिरफ्तारी के बाद सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति पर कानूनी आरोप हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन जल, जंगल और ज़मीन के सवाल उठाने वाले आंदोलनों को आपराधिक मामलों से जोड़ना लोकतांत्रिक अधिकारों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। दूसरी ओर, पुलिस और राज्य सरकार का पक्ष सामने आना भी इस पूरे मामले की निष्पक्ष समझ के लिए आवश्यक होगा।
भूमकाल समाचार इस मामले में पुलिस, राज्य सरकार और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध होते ही उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।
