11 लाख प्रधानमंत्री आवास का दावा: आंकड़ों का सच क्या है?
भूमकाल पड़ताल |

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने दावा किया है कि सरकार गठन के बाद प्रदेश में 11 लाख से अधिक प्रधानमंत्री आवास पूर्ण किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि के अवसर पर 11 हितग्राहियों को प्रतीकात्मक रूप से आवास की चाबी भी सौंपी और ‘मोर गांव–मोर पानी’ महाअभियान पर आधारित कॉम्पेंडियम का विमोचन किया।
सरकार का कहना है कि पहली कैबिनेट बैठक में 18 लाख आवासों के लिए राशि जारी करने का निर्णय लिया गया था और पिछले ढाई वर्षों में 11 लाख से अधिक आवास पूरे हुए। साथ ही यह भी दावा किया गया कि बीते वित्तीय वर्ष में लगभग 6 लाख आवास पूर्ण कर छत्तीसगढ़ देश में पहले स्थान पर रहा।
लेकिन कुछ महत्वपूर्ण सवाल हैं—
क्या 11 लाख आवास वास्तव में नए स्वीकृत और निर्मित हैं, या इनमें पहले से स्वीकृत और निर्माणाधीन आवास भी शामिल हैं?
क्या सरकार ने पूर्ण आवासों की ग्राम पंचायतवार और जिलावार सूची सार्वजनिक की है?
कितने आवास आज भी अधूरे हैं और कितने पात्र परिवार अब भी आवास की प्रतीक्षा कर रहे हैं?
क्या केंद्र और राज्य सरकार द्वारा बताए गए आंकड़े पूरी तरह मेल खाते हैं?
जिन परिवारों को आवास मिला, क्या सभी में बिजली, पानी, शौचालय और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध हैं?
‘मोर गांव–मोर पानी’ अभियान पर भी सवाल
सरकार ने एक लाख से अधिक जल संरक्षण कार्यों का दावा किया है। लेकिन इन परियोजनाओं का स्वतंत्र सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) कब हुआ? कितने जलस्रोत वास्तव में उपयोगी बने? कितने कार्य कागज़ों से निकलकर ज़मीन तक पहुंचे?
भूमकाल समाचार की मांग
यदि सरकार के दावे सही हैं तो उन्हें जिलावार, पंचायतवार, लाभार्थीवार और जियो-टैग्ड आंकड़े सार्वजनिक करने चाहिए, ताकि जनता स्वयं देख सके कि विकास के दावे ज़मीन पर कितने मजबूत हैं।
लोकतंत्र में उपलब्धियों का सबसे बड़ा प्रमाण सरकारी मंच नहीं, बल्कि जनता की ज़िंदगी में दिखने वाला बदलाव होता है।
