प्रथम स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त 1947) – ऐतिहासिक निर्देश
आज़ादी से पहले छत्तीसगढ़ , सेंट्रल प्रोविंस एवं बरार प्रांत का हिस्सा था। स्वतंत्र भारत के पहले स्वतंत्रता दिवस को गरिमा और भव्यता के साथ मनाने के लिए 2 अगस्त 1947 को तत्कालीन मुख्य सचिव पी.एस. राव ( political and military department )द्वारा सभी ज़िलों को विस्तृत निर्देश भेजे गए।



इन ऐतिहासिक आदेश में कई रोचक बातें दर्ज हैं—
जय स्तंभ एवं स्मारक वृक्ष – सभी जिलों और तहसीलों में “जयस्तंभ” स्थापित करने तथा उसके पास एक स्मारक वृक्ष (अधिकतर बरगद) लगाने के निर्देश।
परेड एवं सलामी – जिला मुख्यालय, तहसील मुख्यालय और प्रत्येक पुलिस स्टेशन पर पुलिस परेड आयोजित करने तथा वरिष्ठ अधिकारी द्वारा सलामी लेने का कार्यक्रम। नागपुर में परेड में सेना की भागीदारी और हवाई जहाज़ द्वारा रंगीन कागज़ी पट्टियाँ गिराने की योजना भी थी।
भवन सजावट व रोशनी – सभी सरकारी और सार्वजनिक भवनों को राष्ट्रीय ध्वज और बंटिंग (केसरिया, सफेद, हरा) से सजाना, रात में बिजली या चिराग़ से प्रकाश व्यवस्था करना।
गरीबों को भोजन व बच्चों में मिठाई – खाद्य सामग्री की कमी के कारण गरीबों को भोजन कराना संभव नहीं था, परंतु विद्यालय के बच्चों में मिठाई बाँटने के लिए निजी सहयोग से व्यवस्था करने के निर्देश।
जनभागीदारी – सभी कार्यक्रमों में जनता की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ढोल-नगाड़े और शहनाई बजाने तक की व्यवस्था का उल्लेख।
नागपुर में विशेष कार्यक्रम – राजधानी नागपुर में सचिवालय और काउंसिल हॉल पर राष्ट्रीय ध्वज फहराना, तथा मॉरिस कॉलेज मैदान में जयस्तंभ का शिलान्यास व स्मारक वृक्षारोपण।
आज़ादी के इस पहले उत्सव के निर्देशों में देशभक्ति, अनुशासन और सामूहिकता की झलक स्पष्ट दिखती है।
यह केवल एक आदेश नहीं, बल्कि एक युग के जन्म का दस्तावेज़ है।
इतिहास प्रेमियों के लिए यह पत्र न सिर्फ़ पढ़ने योग्य है, बल्कि हमें याद दिलाता है कि आज़ादी का उत्सव केवल एक दिन का नहीं, बल्कि पीढ़ियों की भावना और त्याग का प्रतीक है।

तारण प्रसाद सिन्हा
