बच्ची थी, नादान थी, उसे क्या मालूम कि विकास पहले आता है, बचपन बाद में

रायपुर छत्तीसगढ़ से पत्रकार रजनी ठाकुर की पोस्ट ज्यों का त्यों
हमारे यहां विकास बड़ा संवेदनशील है। उसे गरीबों से एलर्जी है। जहां गरीब दिखे, वहीं विकास को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है।अब नकटी गांव वालों को कौन समझाए कि सरकार उनका कितना ख्याल रखती है। पचास-साठ साल रहने दिया। बिजली दी, पानी दिया, टैक्स लिया, वोट लिया, हर चुनाव में याद किया। अब जब जमीन की असली जरूरत पड़ी तो ये लोग उसे अपनी बताने लगे। गरीब आदमी भी कभी-कभी बड़ी अजीब हरकतें करने लगता है।
सरकार ने इनके लिए EWS के मकान भी दिए। यानी गरीब को गरीब वाला घर। इससे ज्यादा लोकतंत्र और क्या होगा? मगर इन्हें वहां भी दिक्कत है।
वहीं हमारे दिलदार नेताओं को देखिए, मंत्रियों के नए बंगले बनकर तैयार हैं। लेकिन उनका त्याग देखिए। अभी भी पुराने बंगलों में रह रहे हैं। विधायक कॉलोनी पहले से है, पर विधायकों का मन भी बड़ा निर्मल है। वे शहर से दूर बसना चाहते हैं। शहर के भीतर की जमीन किसी अमीर के काम आ जाए, यही तो जनप्रतिनिधि का धर्म है।
रात में फोर्स तैनात कर दी गई ताकि सुबह तक सब अपनी “सही जगह” पहुंच जाएं, कहते हैं एक छोटी बच्ची टूटते हुए अपने घर में बैठी रो रही थी, जाने को तैयार नहीं थी। पुलिस को उसे भी हटाना पड़ा। बच्ची थी, नादान थी। उसे क्या मालूम कि विकास पहले आता है, बचपन बाद में।

असल परेशानी सरकार की नहीं है। परेशानी इन लोगों की समझ में है। ये आज भी घर को ईंट, दीवार और यादों का जोड़ मानते हैं। इन्हें कौन समझाए कि आजकल गरीब का घर वहां होता है, जहां सरकार कह दे। बाकी तुलसीदास बहुत पहले लिख गए थे—”समरथ को नहीं दोष गोसांई।” तब यह चौपाई थी। अब सरकारी फाइल का नोटशीट लगती है।
CMO Chhattisgarh OP Choudhary Brijmohan Agrawal
बाक़ी Bhupesh Baghel Deepak Baij Dr. Charan Das Mahant समेत विपक्ष के कई नेता इतने दुखी है छत्तीसगढ़ियों का हक़ छीने जाने पर, कि एक शब्द भी नहीं लिख पा रहे हैं
तस्वीरें मौके पर मौजूद हमारे साथियों Siddharth Dev Shivankar Dwivedi ने ली हैं
