आदिवासी संस्कृति बचाओ: मनीष कुंजाम ने स्कूलों में मंत्रोच्चार पर सवाल उठाए

बस्तर के वरिष्ठ आदिवासी नेता एवं पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने स्कूलों में कराए जा रहे मंत्रोच्चार और प्रार्थना पद्धति को लेकर केंद्र एवं राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा को लागू करने का प्रयास किया जा रहा है, जो आदिवासी समाज की परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान के विपरीत है।
और आदिवासी कभी हिंदू नहीं थे
स्कूलों में मंत्रोच्चार और प्रार्थना पद्धति पर मनीष कुंजाम का बड़ा बयान
केंद्र व राज्य सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल, आरएसएस विचारधारा थोपने का आरोप
जगदलपुर, 18 जून 2026। बस्तर के वरिष्ठ आदिवासी नेता एवं पूर्व विधायक मनीष कुंजाम ने स्कूलों में कराए जा रहे मंत्रोच्चार और प्रार्थना पद्धति को लेकर केंद्र एवं राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा को लागू करने का प्रयास किया जा रहा है, जो आदिवासी समाज की परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान के विपरीत है।
मनीष कुंजाम ने कहा कि सरकारी स्कूलों में बच्चों से विशेष धार्मिक मंत्रों और प्रार्थनाओं का पाठ कराना उचित नहीं है। उनका कहना था कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था धर्मनिरपेक्ष होनी चाहिए और उसमें किसी एक धर्म या विचारधारा को बढ़ावा देने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि आदिवासी कभी हिंदू नहीं थे और उनकी अलग सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान रही है।
उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षा के माध्यम से एक विशेष विचारधारा को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि शिक्षा संस्थानों में संविधान की मूल भावना और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का पालन सुनिश्वित किया जाए और आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों में स्थानीय संस्कृति, भाषा और परंपराओं को प्राथमिकता दी जाए।
