बस्तर की 485 बसाहटों को मिलेगी बारहमासी सड़क सुविधा, 804 करोड़ के 263 सड़क कार्य प्रस्तावित

पीएमजीएसवाई के चौथे चरण में सड़क संपर्क विस्तार की पहल; 280 बसाहटों के लिए प्रस्ताव केंद्र को मिले, 474 अन्य बसाहटों की डीपीआर तैयार की जा रही
रायपुर, 29 अक्टूबर। बस्तर संभाग के दूरस्थ और दुर्गम इलाकों में सड़क संपर्क मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। संभाग की 485 बसाहटों के लिए सड़क निर्माण कार्यों को स्वीकृति मिल चुकी है। वहीं, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के चौथे चरण के दूसरे बैच के तहत 280 बसाहटों को जोड़ने के लिए 263 सड़क निर्माण कार्यों के प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे गए हैं। इनकी कुल अनुमानित लागत 804.06 करोड़ रुपये है।
उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बस्तर की भौगोलिक परिस्थितियों और नक्सलवाद से मुक्त हुए गांवों की जरूरतों को देखते हुए केंद्र सरकार से सड़क निर्माण के निर्धारित मानकों में विशेष छूट देने का अनुरोध किया था। इस संबंध में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पत्र के माध्यम से राज्य सरकार को विभिन्न स्वीकृतियों, प्रस्तावों और आगे की कार्यवाही की जानकारी दी है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बस्तर में सड़क संपर्क विस्तार के लिए केंद्र सरकार की पहल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के प्रति आभार व्यक्त किया है।
1,168 बसाहटों में सड़क संपर्क के लिए चल रही प्रक्रिया
केंद्रीय मंत्री द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, बस्तर संभाग की कुल 1,168 बसाहटों को सड़क संपर्क से जोड़ने के लिए अलग-अलग चरणों में कार्यवाही की जा रही है। इनमें से 485 बसाहटों के सड़क निर्माण कार्य स्वीकृत किए जा चुके हैं। इसके अलावा लगभग 474 अन्य चिन्हित बसाहटों के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार किए जा रहे हैं।
पीएमजीएसवाई-4 के पहले बैच में संभाग की 234 बसाहटों के लिए सड़क निर्माण कार्यों को स्वीकृति मिली है। इनमें बस्तर जिले की 87, बीजापुर की 44, दंतेवाड़ा की 12, कांकेर की 41, कोंडागांव की 34 और सुकमा की 16 बसाहटें शामिल हैं।
दूसरे बैच के तहत 280 बसाहटों के लिए प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनसे संबंधित 263 सड़कों की कुल लंबाई 841.825 किलोमीटर और अनुमानित लागत 804.06 करोड़ रुपये है।
सातों जिलों की बसाहटों को जोड़ने की तैयारी
पीएमजीएसवाई-4 के दूसरे बैच में बस्तर जिले की 114, बीजापुर की 125, दंतेवाड़ा की 63, कांकेर की 140, कोंडागांव की 31, नारायणपुर की 136 और सुकमा की 146 बसाहटों को सड़क संपर्क उपलब्ध कराने के प्रस्ताव शामिल हैं।
इन क्षेत्रों में सड़क निर्माण की योजना तैयार करने के लिए ग्रामीण सड़क सर्वे ऐप के माध्यम से सर्वेक्षण किया जा रहा है। साथ ही प्रस्तावों को गति शक्ति योजना से जोड़ने की प्रक्रिया भी चल रही है।
सड़कों का विस्तार होने से अंदरूनी वनांचलों में रहने वाले ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य केंद्रों, स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और बाजारों तक पहुंच आसान हो सकेगी। इससे कृषि उपज के परिवहन और स्थानीय व्यापार को भी सुविधा मिलने की उम्मीद है।
373 पुलों के प्रस्तावों पर विचार, जल्द स्वीकृति की संभावना
सड़क संपर्क के साथ बस्तर में पुल निर्माण को भी गति देने की तैयारी है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री के पत्र के अनुसार, पीएमजीएसवाई-4 के पहले बैच के तहत 206 पुलों और पीएम-जनमन योजना के अंतर्गत 167 पुलों के प्रस्तावों पर विचार के लिए अधिकार प्राप्त समिति की बैठक आयोजित की गई थी। इन प्रस्तावों को शीघ्र स्वीकृति प्रदान किए जाने की जानकारी दी गई है।
बस्तर संभाग में 55 लंबे पुलों के प्रस्ताव भी तैयार किए गए हैं। वहीं, नारायणपुर जिले में पीएम-जनमन योजना के तहत 22 लंबे पुलों के निर्माण के प्रस्ताव बनाए गए हैं। इनकी अनुमानित लागत करीब 87.45 करोड़ रुपये है।
बारिश के दौरान नदी-नालों में जलस्तर बढ़ने से कई गांवों का संपर्क टूट जाता है। ऐसे में पुलों का निर्माण ग्रामीणों के आवागमन और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
नक्सलमुक्त गांवों के लिए सड़क निर्माण के नियमों में छूट की मांग
बस्तर के कई गांव घने जंगलों और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों में स्थित हैं। इनमें अनेक बसाहटों की आबादी 100 से भी कम है। पीएमजीएसवाई के मौजूदा जनसंख्या संबंधी मानकों के कारण ऐसे गांव सड़क निर्माण की पात्रता से बाहर रह जाते हैं।
इसी समस्या को देखते हुए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने केंद्र सरकार से विशेष छूट देने का आग्रह किया था। उन्होंने 10 किलोमीटर की परिधि में स्थित छोटी-छोटी बसाहटों को एक क्लस्टर मानकर उनकी संयुक्त आबादी के आधार पर सड़क स्वीकृति देने और निर्धारित जनसंख्या संबंधी शर्तों में राहत देने का सुझाव दिया था।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया है कि शेष पात्र बसाहटों की पहचान और उनकी सड़क संबंधी जरूरतों का आकलन करने के लिए ग्राम सड़क सर्वेक्षण (जीएसएस) ऐप के माध्यम से चार महीने का सर्वे शुरू किया गया है। क्लस्टर आधारित व्यवस्था और विशेष छूट के अनुरोध पर सर्वेक्षण से प्राप्त तथ्यों तथा लागू दिशा-निर्देशों के आधार पर विचार किया जाएगा।
सड़क संपर्क को विकास की प्राथमिकता बता रहे विजय शर्मा
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा है कि नक्सलवाद के प्रभाव में कमी आने के बाद बस्तर में विकास की नई संभावनाएं बन रही हैं। सरकार की प्राथमिकता है कि जिन गांवों में वर्षों तक भय और असुरक्षा का माहौल रहा, वहां सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, संचार और रोजगार जैसी सुविधाएं पहुंचाई जाएं।
उन्होंने कहा कि सड़क संपर्क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि ग्रामीणों के सामाजिक और आर्थिक विकास का आधार है। पक्की सड़क बनने से बच्चों की शिक्षा, मरीजों के उपचार और किसानों की उपज को बाजार तक पहुंचाने में सुविधा होगी।
शर्मा ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से बस्तर के दूरस्थ गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि शेष पात्र बसाहटों को भी चरणबद्ध तरीके से सड़क संपर्क उपलब्ध कराया जा सकेगा।
