ब्रेकिंग: LIC के MD दिनेश पंत ने लिया VRS, LIC के निवेश और जवाबदेही पर उठे सवाल
नई दिल्ली। भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। सरकार ने LIC के Managing Director दिनेश पंत के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के अनुरोहैध को मंजूरी दे दी है। LIC के अनुसार पंत 24 सितंबर 2026 को कार्यमुक्त हो गए और अब MD तथा Key Managerial Personnel नहीं हैं।
दिनेश पंत ने जून 2025 में LIC के MD का पद संभाला था और उनका कार्यकाल मई 2027 तक निर्धारित था। इस लिहाज से उनका समय से पहले पद छोड़ना LIC में चर्चा का विषय बन गया है।
इस बीच LIC से जुड़े वित्तीय मामलों को लेकर भी गंभीर सवाल मौजूद हैं। हाल ही में LIC Housing Finance की शिकायत पर CBI ने Zee समूह के संस्थापक सुभाष चंद्रा और अन्य लोगों के खिलाफ कथित ₹1,322 करोड़ के ऋण-धोखाधड़ी मामले में FIR दर्ज की है। CBI के मुताबिक मामला 2018 में दिए गए लगभग ₹980 करोड़ के दो ऋणों और कथित रूप से बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत की गई नेटवर्थ से जुड़ा है।
यह मामला LIC की सीधे शेयर बाजार में निवेश संबंधी जांच नहीं, बल्कि LIC की सहायक कंपनी LIC Housing Finance से दिए गए ऋण से संबंधित है। इसलिए दोनों मामलों को एक ही घटनाक्रम बताना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
दूसरी ओर, LIC के शेयर ने पिछले पांच वर्षों में नकारात्मक रिटर्न दिया है। जुलाई 2026 तक के पांच वर्ष के आंकड़ों में LIC उन सूचीबद्ध जीवन बीमा कंपनियों में शामिल था जिनके शेयर रिटर्न में गिरावट दर्ज हुई थी। हालांकि, इसे “LIC डूब रहा है” या “पॉलिसीधारकों का पैसा डूबने वाला है” कहने का आधार इन आंकड़ों से नहीं मिलता।
दिनेश पंत के कार्यकाल और LIC के निवेश संबंधी फैसलों को लेकर यदि कोई आरोप लगाए जा रहे हैं, तो उनकी स्वतंत्र जांच और आधिकारिक दस्तावेज सामने आना जरूरी है। फिलहाल उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टों में उनके VRS को अडानी या अंबानी के शेयरों में निवेश से जोड़ने का प्रमाण नहीं मिला है।
सबसे बड़ा सवाल यही है—देश के करोड़ों पॉलिसीधारकों के पैसे से चलने वाली LIC में निवेश संबंधी फैसलों की जवाबदेही आखिर किसकी है?
LIC के निवेश, जोखिम और सरकार की भूमिका पर पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। क्योंकि यह केवल शेयर बाजार का सवाल नहीं है—यह करोड़ों पॉलिसीधारकों के भरोसे का सवाल है।
