यूपी में कानून का राज नहीं, पुलिसिया राज चल रहा है.

“40 रु. का कुर्ता पहन नेता बन जाते हैं… ये कह SSP ने बहुत पीटा. पुलिस से बोले- एक फायर मुझ पर करो और इनका एनकाउंटर कर दो.,”
फिर सपा नेता मोहित जाटव और दिग्विजय सिंह पर कहर टूट पड़ा.
चोली के पीछे क्या है… गाना बजाया और इतनी मारपीट के बाद कहा- नाचो. न नाचने पर पीटा. नचवाया. मोहित जाटव और दिग्विजय सिंह ये सब बताते हुए रोने लगते हैं.
मेरठ में पुलिसिया कहर का शिकार मोहित जाटव सपा अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय सचिव हैं. डॉ. दिग्विजय भाटी भारतीय किसान यूनियन (आंबेडकर) के जिलाध्यक्ष.
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दलित छात्रा ललिता गौतम मर्डर केस में प्रदर्शन करने पर पुलिस ने इन्हें भी जेल भेजा था. इसी को लेकर दोनों नेता एसएसपी अविनाश पांडेय से मिलने गए थे.
दलित नेता मोहित जाटव के अनुसार- हम बता रहे थे कि हम उस प्रोटेस्ट में शामिल भी नहीं थे. SSP भड़क गए. जूता चलाया और पीटा.
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सिविल लाइन्स थाना प्रभारी अखिलेश गौड़ से कहा- इनकी खातिरदारी करो. फिर हमें एसओजी दफ्तर ले जाया गया. हाथ पैर बाँध बहुत पीटा.
सपा विधायक अतुल प्रधान रात दो बजे पहुंचे. तब छोड़ा… इसके बाद दोनों नेताओं ने प्रेस कांफ्रेंस की.
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यूपी की सियासत में बवाल मचा. अविनाश पांडेय का ट्रांसफर कर लखनऊ बुला लिया गया. झाँसी से एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ती को मेरठ भेजा गया.
चार्ज मिलते ही नए SSP ने आरोपी इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़, एसआई मुलायम सिंह, एसआई हरिओम, हेड कांस्टेबल श्याम बाबू, कांस्टेबल मुकेश कुमार, कांस्टेबल सुमित कुमार, महिला कांस्टेबल नीलम कौर और ललित कुमार सहित 8 को लाइन हाजिर किया.
जांच के आदेश हो गए. अब ये पुलिस वाले कह रहे हैं- हमने वही किया जो हमसे एसएसपी ने कहा था.
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यूपी में कानून का राज नहीं, पुलिसिया राज चल रहा है. कानून व्यवस्था का हाल बुरा है. रोज एनकाउन्टर हो रहे हैं, पर व्यवस्था संभल नहीं रही. जब ऐसी छूट मिल जाती है तो ताकत इसी रास्ते पर चलती है.
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तमाम घटनाएँ इस बात की गवाह हैं.
