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1984 में लद्दाख के लिए वांगचुक के पितासोनम वांग्याल ने किया था अनशन, इंदिरा गांधी ने लेह पहुंचकर तुड़वाया था

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इतिहास का एक दिलचस्प पन्ना… जब राजनीतिक संवेदनशीलता जिंदा थी

लेह। लद्दाख में संवैधानिक अधिकारों और जनआंदोलनों की चर्चा के बीच 1984 का एक ऐतिहासिक प्रसंग फिर चर्चा में है। लद्दाख के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक सोनम वांग्याल ने अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मांग को लेकर भूख हड़ताल की थी।

सोनम वांग्याल के संस्मरणों और लद्दाख के ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी स्वयं लेह पहुंचीं, आंदोलनकारियों से बातचीत की और ST दर्जा देने का आश्वासन दिया। इसके बाद उन्होंने सोनम वांग्याल को शीतल पेय (जूस) पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया।

हालांकि ST का दर्जा तत्काल नहीं मिला। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद यह प्रक्रिया आगे बढ़ी और अंततः 1989 में लद्दाख के लोगों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्रदान किया गया।

मगर किसी प्रधानमंत्री का देश की राजधानी से हजार किलोमीटर दूरअनशन स्थल पहुंचकर अपने हाथों से जूस पिलाकर अनशन तुड़वाना तब की प्रक्रिया थी जब राजनीतिक संवेदनशीलता जिंदा थी अब ऐसी उम्मीद करना बेमानी है ।

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