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UN में उठा मुस्लिम वोटरों का सवाल: SIR प्रक्रिया पर भारत सरकार को UN विशेषज्ञों का पत्र

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भूमकाल समाचार | विशेष रिपोर्ट
नई दिल्ली, 15 जुलाई 2026

संयुक्त राष्ट्र के तीन स्वतंत्र विशेष दूतों (Special Rapporteurs) ने भारत सरकार को पत्र लिखकर चुनाव आयोग की Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया में मुस्लिम और अन्य अल्पसंख्यक मतदाताओं के नामों के बड़े पैमाने पर हटाए जाने पर गंभीर चिंता जताई है। विशेषज्ञों ने इसे लोकतंत्र के मूल अधिकार पर हमला बताया है और भारत से विस्तृत जवाब मांगा है।

UN पत्र की मुख्य बातें
1 मई 2026 को लिखे गए पत्र (AL IND 8/2026) में Nicolas Levrat (minority issues), Irene Khan (freedom of opinion & expression) और Nazila Ghanea (freedom of religion or belief) ने कहा कि SIR के दौरान देशभर में लगभग 5.2 करोड़ नाम मतदाता सूचियों से हटाए गए, जिनमें पश्चिम बंगाल में अकेले 91 लाख नाम शामिल हैं।

पत्र में खास तौर पर नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र का जिक्र है, जहां हटाए गए मतदाताओं में 95 प्रतिशत मुस्लिम बताए जा रहे हैं, जबकि वहां मुस्लिम आबादी कुल मतदाताओं की सिर्फ 25 प्रतिशत के करीब है। कई प्रभावित नागरिकों के पास आधार, वोटर आईडी और अन्य वैध दस्तावेज होने के बावजूद उनके नाम काट दिए गए। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि अल्पसंख्यकों, खासकर मुस्लिम और बंगाली मूल के लोगों को विदेशी या घुसपैठिए बताकर निशाना बनाया जा रहा है।

पत्र में कहा गया है, “यह प्रक्रिया भारतीय मुस्लिम नागरिकों को अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के साथ जोड़कर भेदभाव को बढ़ावा दे रही है।” विशेषज्ञों ने ‘Detect, Delete and Deport’ जैसे सरकारी बयानों पर भी आपत्ति जताई।

ECI का बचाव
चुनाव आयोग ने इन आरोपों को निराधार और सांप्रदायिक बताया है। ECI का कहना है कि SIR का उद्देश्य मृत मतदाताओं, दोहरे नामों, स्थानांतरित व्यक्तियों और अयोग्य नामों को हटाकर स्वच्छ मतदाता सूची तैयार करना है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर यह अभियान चलाया जा रहा है। आयोग ने दावा किया है कि नाम हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी है और प्रभावित लोगों को अपील का अधिकार है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया
विपक्षी दलों, खासकर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और अन्य ने इसे मुस्लिम वोटरों को चुनावी प्रक्रिया से बाहर करने की साजिश बताया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले इस अभियान का समय भी विवादास्पद माना जा रहा है। कुछ संगठनों ने दावा किया कि मुस्लिम बहुल इलाकों में नाम कटने की दर ज्यादा है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है।

विशेषज्ञों की मांग
UN विशेषज्ञों ने भारत सरकार से सात प्रमुख सवाल पूछे हैं, जिनमें शामिल हैं:
हटाए गए मतदाताओं का धर्म और समुदाय-वार आंकड़ा।
भेदभाव रोकने के उपाय।
AI आधारित सिस्टम की पारदर्शिता।
प्रभावित लोगों को राहत देने की प्रक्रिया।

60 दिनों की अवधि के बाद यह पत्र सार्वजनिक किया गया।

क्या कहते हैं विश्लेषक?
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि मतदाता सूची शुद्धिकरण जरूरी है, लेकिन यदि इसमें किसी खास समुदाय को निशाना बनाया जाता है तो यह संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होगा। भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में चुनावी प्रक्रिया निष्पक्ष और समावेशी होनी चाहिए।

भूमकाल समाचार इस मुद्दे पर नजर रखे हुए है। हम जल्द ही प्रभावित मतदाताओं की मैदानी रिपोर्ट भी पेश करेंगे।

क्या आपको लगता है कि SIR प्रक्रिया निष्पक्ष है या यह वोटर दमन का हिस्सा है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।

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