12 अगस्त एलिफेंट डे पर विशेष-एक उत्पाती हाथी के’कुमकी हाथी’ बनने की कहानी

उत्पात मचाते हुये एक युवा दंतैल हाथी को राजनांदगांव की तरफ़ जाते हुए वन विभाग ने ग्यारह सांल पूर्व पकड़ा, और उसको सरगुजा से तीन साल पूर्व लाली हथिनी का जोड़ीदार बनाने अचानकमार टाइगर रिजर्व ( छतीसगढ़) में सिहावल लाया गया। इसका नाम रखा गया राजू उसे सँगनी के रूप में ‘लाली’ मिल गई। आज यह दंतैल ‘कुमकी हाथी’ है। यह कहानी इसी दंतैल हाथी की है। लाली से उसके दो शावक एक के बाद हुये दोनो नर है।

मादा-नर हाथी के होने के साथ अचानकमार टाइगर रिजर्व में स्वमेव एलिफेंट कैप का प्रादुर्भाव हुआ। आज इस कैम्प इन हाथियों के लिए सौर ऊर्जा से चलित मोटर पंप है, तीन शेड और मेडिकल किट के साथ महावत के परिवार है। एटीआर के सिहावल कैप में ये हाथी रहते हैं।
राजू हाथी आज एक ऐसा साधा हाथी है जो रोज गश्त में निकल कर जंगल की सुरक्षा करता,गश्त में लाली भी सँग होती है। करीब दस ग्यारह किमी की एटीआर(अचानकमार टाइगर रिजर्व ) में लकड़ी,चोरी करने लिए राजू हाथी ‘दरोगा’ से कम नहीं। वह अपने बड़े-बड़े कानों से लकड़ी कटाई की आवाज सुन कर पग-पग चोरों के करीब पहुंचता और उसे देखते लकड़ी चोर दहशत में भाग खड़े होते हैं। पर साइकिल छूट जाती हैं। राजू सूंड से साइकिल उठा कर महावत को दे देता हैं। सौ से ज्यादा साइकिल राजू हाथी उठा कर ला चुका है।
हाथी राजू के सिर पर बहुत काम है, जैसे गश्त के दौरान सड़क पर गिरे पेड़ को किनारे करना, गिरे पेड़ की डालें और पेड़ से चारा तोड़ कर अपने परिवार के लिए लाना,है।
मदकाल में राजू मदमस्त हो जाता है तब महावत शिवमोहन राजवाड़े के अलावा किसी को करीब फटकने नहीं देता। हाथी राजू और परिवार के लिए चारा के अलावा और भी उनके पसंदीदा आहार दिया जाता है। जिसमें विविध अन्न और तेल,गुड़ सब सही अनुपात में मिला कर बनाया जाता। यह उनको पालतू बनाने से लेकर जीवित रहने तक दिया जाता है, नहीं तो जंगल में उसके खाने की कोई कमी नहीं। डाक्टर पी के चंदन यहां इन हाथियों के कुनबे की स्वास्थ्य की जांच करने एलिफेंट कैम्प नियमित पहुंचते हैं।
हमारा हीरो हाथी राजू अब पूरे कद का विशाल दंतैल हो गया है वह सध चुका है कुमकी हाथी की तरह।
कुमकी हाथी किसे कहते हैं,
कुमकी हाथी वह बड़े और सधे हाथी होते हैं जो आवाज के साथ महावत के पैर के इशारे भी समझते और चलते हैं। यह खामोशी जरूरी है क्योकि जब किसी ‘जंगली हाथी या टाइगर की घेराबन्दी करनी हो तो मनुष्य की आवाज वह ‘चक्रव्यूह’ से निकल सकता है। इसलिए कुमकी हाथी पर सवार महावत पैर से हाथी के कान के करीब इशारों से दाएं, बाएं,रुकना,झुकना ख़ामोश संकेत देता है जिससे योजना कामयाब होती है।
जंगली हाथी मिलने आते हैं
राजू हाथी कल उपद्रवी हाथी कुमकी हाथी बन चुका है। इस बीच चार जंगली हाथी भी एटीआर में बस गए हैं। हाथी अपने तरीके से मीलों दूर संवाद करते है। यह ध्वनि हम नहीं सुन सकते। कभी कभी ये जंगली हाथी एलिफेंट कैम्प पहुंच जाते हैं। मुलाकात में थोड़ी देर बाद महावत और अन्य शोर करते हैं तब राजू हाथी भी मेहमान हाथों से किनारा काट उनको विदाई के लिये कह देता है। जंगली हाथी में दो नर और दो मादा है ।
(-प्राण चड्ढा,
भूतपूर्व मेम्बर मप्र और छतीसगढ़
वाइल्ड लाइफ बोर्ड)
