“मीडिया पर पूंजी का कब्जा, सिनेमा से फैलाया जा रहा सांप्रदायिक एजेंडा”
लोकजतन सम्मान समारोह और शैलेन्द्र शैली स्मृति व्याख्यान माला में लोकतंत्र, पत्रकारिता और संस्कृति पर तीखे सवाल; वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र शर्मा सम्मानित, कमल शुक्ला को मिला 2020 का सम्मान-पत्र

भोपाल | भूमकाल समाचार
ऐसे समय में जब मुख्यधारा के मीडिया की निष्पक्षता, लोकतंत्र की सेहत और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, भोपाल में आयोजित शैलेन्द्र शैली स्मृति व्याख्यान माला 2026 और लोकजतन सम्मान समारोह जनपक्षधर पत्रकारिता और लोकतांत्रिक मूल्यों के पक्ष में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप के रूप में सामने आया।
दुष्यंत कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय में 24 जुलाई को आयोजित समारोह में वरिष्ठ जनवादी पत्रकार व प्रतिरोध के लिए प्रतिबद्ध साप्ताहिक लोक लहर के संपादक राजेंद्र शर्मा को लोकजतन सम्मान 2026 से सम्मानित किया गया। वहीं, कोविड-19 महामारी के कारण वर्ष 2020 में सम्मानित घोषित किए गए भूमकाल समाचार के संपादक एवं पत्रकार कमल शुक्ला को औपचारिक रूप से सम्मान-पत्र प्रदान किया गया।

अपने संबोधन में राजेंद्र शर्मा ने कहा कि भारतीय मीडिया आज अपने इतिहास के सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में जनता की आवाज़ बना मीडिया आज बड़े कॉरपोरेट हितों और सत्ता के प्रभाव में जनसरोकारों से दूर होता जा रहा है। किसानों के आंदोलन से लेकर आज तक जनता का एक बड़ा वर्ग मुख्यधारा के मीडिया पर अविश्वास जता रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मीडिया का दायित्व सत्ता से सवाल पूछना है, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा सत्ता का औजार बनता दिखाई दे रहा है।
सम्मान ग्रहण करते हुए कमल शुक्ला ने कहा कि पत्रकारिता केवल रोज़गार नहीं, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का दायित्व है। उन्होंने कहा कि लोकजतन सम्मान को वे व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि जनपक्षधर और प्रतिबद्ध पत्रकारिता के सम्मान के रूप में देखते हैं। उन्होंने संकल्प व्यक्त किया कि आगे भी उनकी पत्रकारिता जनता के पक्ष में और सत्ता से सवाल पूछने की दिशा में निरंतर जारी रहेगी।

ज्ञात होगी पत्रकारिता जगत के लिए प्रतिष्ठित लोकजतन सम्मान से ऐसे पत्रकारों को सम्मानित किया जाता है, जो भारतीय पत्रकारिता के आज के दु:समय में भी सच बोलने और लिखने का दुस्साहस कर रहे हैं। इस सम्मान से अभी तक डॉ. राम विद्रोही (ग्वालियर), कमल शुक्ला (बस्तर-रायपुर), लज्जा शंकर हरदेनिया (भोपाल), अनुराग द्वारी (भोपाल), राकेश अचल (ग्वालियर), पलाश सुरजन (भोपाल), शहीद पत्रकार मुकेश चंद्राकर (बस्तर ) जैसे प्रमुख पत्रकारों को अभिनंदित किया जा चुका है।

समारोह के अंतर्गत आयोजित “आज का भारत और हिंदी सिनेमा” विषय पर वरिष्ठ चिंतक एवं फिल्म विश्लेषक जबरीमल्ल पारख का व्याख्यान कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा। उन्होंने कहा कि हिंदी सिनेमा के एक हिस्से का इस्तेमाल योजनाबद्ध तरीके से इतिहास को विकृत करने और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण पैदा करने के लिए किया जा रहा है। फिल्मों के माध्यम से झूठ को सच और अयथार्थ को यथार्थ की तरह स्थापित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इतिहास की तोड़-मरोड़ कर की गई प्रस्तुतियों के जरिए मुसलमानों को विदेशी आक्रांता के रूप में चित्रित किया जा रहा है, जबकि भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत और भाईचारे की परंपरा को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने इस प्रवृत्ति की तुलना जर्मनी में हिटलर के दौर के प्रचारतंत्र से करते हुए कहा कि सत्ता समर्थित प्रचार फिल्मों का उद्देश्य समाज को विभाजित करना और वास्तविक जनसमस्याओं से ध्यान हटाना है।
जबरीमल्ल पारख ने कहा कि बेरोज़गारी, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दों को पीछे धकेलकर सांप्रदायिक विमर्श को केंद्र में लाया जा रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि तमाम दबावों के बावजूद कुछ फिल्मकार आज भी लोकतांत्रिक और मानवीय मूल्यों की रक्षा का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।
लोकजतन के संपादक बादल सरोज ने बताया कि शैलेन्द्र शैली स्मृति व्याख्यान माला 7 अगस्त तक प्रदेश के तीन दर्जन से अधिक स्थानों पर जारी रहेगी। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ व्यंग्यकार वीरेन्द्र जैन ने की तथा सम्मान-पत्र वरिष्ठ पत्रकार डॉ. राम विद्रोही ने प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन मनोज कुलकर्णी ने किया और आभार संध्या शैली ने व्यक्त किया। इस अवसर पर हाल ही में दिवंगत हुए वरिष्ठ कर्मचारी नेता एस. पी. शर्मा को भी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
