छत्तीसगढ़

पत्रकार पर झूठी FIR और मारपीट के विरोध में तेलीबांधा थाने के सामने डटे शहर के पत्रकार, निलंबन की मांग

48c35b39 c720 403e bf35 f9f813406d92

रायपुर के तेलीबांधा थाने से एक ऐसा हाई-वोल्टेज ड्रामा सामने आया है, जिसने पुलिसिया कार्यप्रणाली और मीडिया के बीच की तल्खी को एक बार फिर चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। सुर्खियों में एक बार फिर वही नाम है, जो अपनी ‘खास कार्यशैली’ के लिए हमेशा चर्चा में रहता है—अजय झा। जी हां, बलौदाबाजार में अपनी तैनाती के दौरान जनता और पत्रकारों के साथ ‘विशेष’ व्यवहार के लिए मशहूर रहे पूर्व थाना प्रभारी अजय झा अब रायपुर के तेलीबांधा में अपनी नई ‘पारी’ खेल रहे हैं, और विवादों ने यहां भी उनका पीछा नहीं छोड़ा है।


इस बार मामला सीधे चौथे स्तंभ यानी मीडिया से टकरा गया है, जिसके बाद तेलीबांधा थाना परिसर आधी रात को किसी राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गया।
शराब के नशे में धुत्त आरक्षक पर लगा मारपीट का आरोप
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब रायपुर के एक स्थानीय पत्रकार और तेलीबांधा थाने में पदस्थ आरक्षक रमेश वर्मा के बीच आमना-सामना हुआ। आरोप है कि आरक्षक रमेश वर्मा ड्यूटी के दौरान शराब के नशे में पूरी तरह धुत्त थे। बात इतनी बढ़ी कि आरक्षक ने अपनी वर्दी की हनक दिखाते हुए पत्रकार के साथ न केवल बदतमीजी की, बल्कि उसके साथ जमकर मारपीट भी कर डाली।
हैरानी की बात तो यह है कि पीड़ित पत्रकार जब न्याय की आस में थाने पहुंचा, तो वहां के ‘मिजाज’ से वाकिफ लोगों को जो डर था, वही हुआ। मारपीट के शिकार पत्रकार की सुनने के बजाय, पुलिसिया रसूख का इस्तेमाल करते हुए उल्टा पत्रकार के ऊपर ही आनन-फानन में FIR दर्ज कर दी गई।


पुलिस की थ्योरी: “साहब, हमारे शासकीय कार्य में बाधा डाली गई!”


इधर, आरोपी आरक्षक रमेश वर्मा और पुलिस महकमे ने इस पूरी कहानी को एक अलग ही रंग देने की कोशिश की है। पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR में आरक्षक ने बयान दिया है कि पत्रकार महोदय ने उनके “शासकीय कार्य में बाधा” पहुंचाई है। आरक्षक का दावा है कि वह अपनी ड्यूटी कर रहे थे और पत्रकार ने न सिर्फ उनके काम में टांग अड़ाई, बल्कि उन्हें देख लेने और भुगत लेने की खुली धमकी भी दी। अब इस ‘शासकीय कार्य’ में कितनी सच्चाई थी और कितनी शराब की ‘अमरबेल’, यह तो जांच का विषय है, लेकिन पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए पत्रकार को ही आरोपी बना डाला।


थाने के सामने ‘दंगल’: आधी रात को धरने पर बैठे शहर के सारे पत्रकार


जैसे ही यह खबर रायपुर के मीडिया जगत में फैली, पत्रकारों का गुस्सा फूट पड़ा। अपने साथी के साथ हुई इस बर्बरता और ऊपर से फर्जी FIR की कार्रवाई से नाराज रायपुर के तमाम प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया के पत्रकार एकजुट होकर तेलीबांधा थाने पहुंच गए।


“जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और सच दिखाने वाले को ही सलाखों के पीछे भेजने की तैयारी हो, तो चुप बैठना गुनाह है।” इसी आक्रोश के साथ पत्रकारों ने थाने के सामने ही डेरा डाल दिया और जबरदस्त धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। आधी रात को थाने के बाहर गूंजते नारों और पत्रकारों के तीखे तेवरों ने पुलिस प्रशासन के हाथ-पैर फुला दिए। पत्रकारों की साफ मांग है कि आरोपी आरक्षक रमेश वर्मा को तत्काल निलंबित किया जाए और पत्रकार पर की गई झूठी FIR को बिना शर्त वापस लिया जाए।
अजय झा का ‘बलौदाबाजार वाला अंदाज’ रायपुर में भी बरकरार!


इस पूरे विवाद के केंद्र में जो नाम सबसे ज्यादा गूंज रहा है, वह है थाना प्रभारी अजय झा का। बलौदाबाजार के लोग आज भी उनके कार्यकाल को याद कर मुस्कुरा देते हैं या फिर अपना सिर पकड़ लेते हैं। बलौदाबाजार में रहते हुए जनता और पत्रकारों के साथ तमीज से बात न करना और हमेशा एक अकड़ में रहना मानो उनकी आदत का हिस्सा बन चुका था। वहां तो यह बातें आम हो चुकी थीं, लेकिन रायपुर की जागरूक मीडिया के सामने उनका यह पुराना ‘बलौदाबाजार वाला ढर्रा’ इस बार भारी पड़ता दिखाई दे रहा है।


बड़ा सवाल: क्या तेलीबांधा पुलिस इस मामले में निष्पक्ष जांच करेगी? या फिर अपने रसूखदार आरक्षक और थाना प्रभारी के पुराने ढर्रे को बचाने के लिए चौथे स्तंभ की आवाज को दबा दिया जाएगा? फिलहाल, थाने के बाहर डटे पत्रकारों के हौसले यह साफ कर रहे हैं कि वे इस बार बिना ‘न्याय’ के पीछे हटने वाले नहीं हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *