संविधान मौन हुआ। शासक मुंह जोर है।।
आज की कविता : 1 संविधान मौन हुआ। शासक मुंह जोर है।। =------------------------= ये लिंचिंग का दौर है। नृशंसता का...
आज की कविता : 1 संविधान मौन हुआ। शासक मुंह जोर है।। =------------------------= ये लिंचिंग का दौर है। नृशंसता का...
फोटो - गूगल मेरी हत्या एक भीड़ ने की अदालत में जिरह हुई कि आरोपी छह थे मैं सबके नाम...
(उन्नाव की बेटी के नाम) आज की कविता जब साज़िश, हादसा कहलाये और साज़िश करने वालों को गद्दी पे बिठाया...
तुम्हें दरकार है एक मखमली आलिंगन की और मेरे बदन में चिपक रहा है लहू मैं यह लहू छिपाना चाहता...
अमृता प्रीतम अपने पूरे होश-ओ-हवास में लिख रही हूँ आज… मैं वसीयत ..अपनी मेरे मरने के बाद खंगालना.. मेरा कमरा...
( आज कवि दिलीप कुमार कौल का जन्म-दिन है । जन्म-दिन की हार्दिक बधाई के साथ उन की एक मशहूर...
कल अपनी पुरानी सोसाइटी में गया था। वहां मैं जब भी जाता हूं, मेरी कोशिश होती है कि अधिक से...
तानाशाह बचपन से तानाशाह नहीं था बचपन में वो बस एक बच्चा था पर उसे रखा गया किसी अमानत की...
तानाशाह बचपन में खाता था मूंगफली तो गिनता जाता था दाने और छिलके लाशों और सिर की गिनती करने के...