आज की कविता

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भगत सिंह अच्छा हुआ तुम न रहे !! – आज की कविता

हमने तुम्हारी वर्षगाँठ को भी धंधा बना लिया है, भगतसिंह हमने तुम्हारी प्रतिमा को भी कुर्बानी का प्रमाण पत्र थामे

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शब्द चिड़ियों की तरह रहती है- आज की कविता

( प्रसिद्ध कवि और छायाकार त्रिजुगी कौशिक जी नहीं रहे । जन संपर्क विभाग में नौकरी करते हुए उन्होंने बस्तर

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हर किसी की सीमा तय करने का वक़्त है– आज की कविता

साकलदीपी ब्राह्मण बताते हैं उत्स मगह मगह के बाहर के साकलदीपियों को खदेड़ दिया जाए कान्यकुब्जों को भेजा जाए कान्यकुब्ज

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