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सामूहिक शिकार रोकने की परम्परा रोकने आदिवासियों के सामने घुटने पर बैठ हाथ जोड़ कर मना लिया डीएफओ ने

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प्रशांत कश्यप

क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि यह महिला जो जमीन पर बैठी हजारों लाठी लिए लोगों के सामने हाथ जोड़कर भीख़ माँग रही है यह कौन है ?

यह महिला पश्चिम बंगाल के जिला मिदनापुर की एडिशनल डीएफओ पुरबी महतो हैं और जिन्होंने कर्त्तव्य पालन के लिए आदिवासियों के सामने हाथ जोड़कर बैठ गयी। वह खुद भी एक आदिवासी परिवार से है । मिदनापुर जिले के लालगंज आदिवासी क्षेत्र में एक परम्परा है जिसमें हाथों में डण्डे-लाठी खुखरी , नुकीले हथियार लिए हजारों आदिवासी शिकार के लिए जंगल में जाते हैं और हज़ारों बेगुनाह मार दिए जाते हैं ,

इस बार भी नियत दिन हजारों आदिवासियों को महा शिकार के लिए निकलना था लेकिन वन विभाग की पूरबी ने तय कर लिया था वह इसे रोकेंगी , उन्होंने पूरे प्रयास किये , महीनों पहले से जागरूकता अभियान चलाये , कानून का भय भी दिखाया लेकिन अंत दिन कुछ भी काम न आया ,

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पांच हजार से अधिक आदिवासी हथियार लेकर जंगल की ओर बढे जा रहे थे , पूरबी महतो ने माहौल भांपते हुए जनजाति के बुजुर्गों से एक भावनात्मक अपील की , वह जमीन पर हाथ जोड़कर बैठ गयीं , और बहुत मार्मिक अपील की , उन्होंने कहा कि अपने हथियार उठाओ और मुझे भी मार दो , लेकिन जब तक मेरी सांस है , मैं आपको आगे नहीं जाने दूँगी

पूरबी महतो की यह भावनात्मक अपील काम कर गई , और बुजुर्गों के निर्णय पर सभी आदिवासी वापस लौट गए , दिल्ली से दूर इस नायिका को बहुत पहचान नहीं मिली , 29 मार्च के टेलीग्राफ अखवार में मुझे यह छोटी सी खबर दिखी तो मुझे लगा कि पूरबी महतो का यह कार्य एक महानायिका का कार्य है ।
( वास्तव में यह आदिवासी परंपरा देश के कोने कोने में निवासरत आदिवासियों में सदियों से प्रचलित रहा है झारखंड में इसे सेंदरा तो बस्तर में हांका, पारद आदि कहते है । वास्तव में यह परंपरा बीज ब्लूम के त्यौहार के बाद एक उत्सव के रूप में मनाया जाता है । मगर अब क्योंकि शिकारियों, तस्करों और खुद सरकार के योजनाओं के तहत भारी संख्या में जंगल की कटाई हो चुकी है, पर्यावरण का संतुलन बिगड़ चुका हैं और वन्य जीव भी दुर्लभ हो चुके हैं तो इस परंपरा को एक सांकेतिक परंपरा के रूप में बदलने के लिए बस्तर में कुछ साल पहले वन विभाग ने खेलकूद और सामूहिक भोज के रूप में उत्सव मनाने का तय किया था मगर अब इसे फंड के अभाव में बंद कर दिया गया है – सम्पादक )

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