दादा लोग यहीं पास में हैं…मीडिया को बुला रहे हैं : अनिल मिश्रा

बस्तर के वरिष्ठ पत्रकार अनिल मिश्रा के अनुभवों का दस्तावेज : जीवंत कहानियों की नजर से देखिये बस्तर

 सुन न। मिलेगा क्या। वो कान में फुसफुसाया।

किससे। इसने पूंछा।
अबे धीरे बोल कोई सुन लेगा। वो पता नहीं किस राज की बात कर रहा था।
मंच पर भाषण चल रहा था। 10 हजार की भीड़ नक्सलवाद मुर्दाबाद के नारे लगा रही थी। चारों ओर पुलिस और आईबी के लोग बिखरे थे। जहाँ देखो वहीं एके 47 और एसएलआर।
सुन ना। यहीं पास में ही हैं। वो फिर फुसफुसाया।
अब तक यह समझ गया था। पर सोचा यहाँ कैसे।
अबे तू किसकी बात कर रहा। इसने इस बार फुसफुसाकर ही पूंछा।
उन्हीं लोग। वो अब भी राजदाराना लहजे से नहीं निकला था।
कौन।
अबे दादा लोग। यहीं पास में हैं। मीडिया को बुला रहे। चलेगा तो चल बढ़िया मौक़ा है। वो जुडूम पर ही कुछ बोलना चाहते हैं। उसने अब एजेंडा भी स्पष्ट कर दिया।
पर कैसे बे। यहाँ जुडूम की इतनी बड़ी मीटिंग चल रही। तू ये क्या बोल रहा होश भी है। किसी को पता चल गया तो बोटी भी नहीं बचेगी। इसने स्थिति का खाका खींचने की कोशिश की। हालांकि एक्साइटेड खुद भी था। पर रिस्क।
कुछ नहीं होगा। अपन जाके लौट आएंगे। किसी को पता नहीं चलेगा। उसने हिम्मत देने का प्रयास किया।
वो जुडूम से जुड़ा था और नक्सलियों से भी। सरकारी नौकरी में था पर काम जुडूम का करता। इधर के कैम्पों में घर उसी ने बनाये थे। दस लाख का काम था।
उस रोज वो इसे नहीं ले जा पाया।
चल बे तू फट्टू है। प्रोग्राम खत्म होने के बाद उसने ताना मारा।
अबे तू देख रहा। वहां कोई चांस था क्या। साले खुद भी मरेगा और अपन को भी मरवायेगा।
चल बे। कुछ नहीं होता। वो इतने नजदीक थे कि अपन दस मिनट में जाके आ भी जाते। उसे न जा पाने का अब भी मलाल था।
क्या पता आ पाते भी या नहीं। इसने उपेक्षा से बात टालने की कोशिश की।
अबे उन लोग इनसे तो ठीक ही हैं। और मेरे साथ जाने से वैसे भी कुछ नहीं होता।
अबे तू जुडूम में है। नौकरी में भी। ठेकेदारी भी जुडूम में कर रहा। फिर भी।
हा हा हा। सब ऐसे ही है भाई। यहाँ कुछ भी कर उनको हिस्सा देना है बस। बाकी कोई दिक्कत नहीं।
सही में। तू कितना देता है।
अभी देना है। चेक कटे तो दूँगा। 2 मांगे हैं पर उतना दूंगा तो मेरा क्या बचेगा। तू चलता तो इस बारे में भी बात करूँगा सोचा था। अब उसका वास्तविक एजेंडा सामने आया।
अगले दिन इसने खबर छापी। नक्सलवाद के दिन लदे।
और इसके कुछ दिन बाद खबर आई। नक्सलियों ने शिक्षक का गला रेता। जुडूम में सक्रियता से नाराज थे नक्सली।
अनिल मिश्रा
04 अक्टूबर 2016

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