शब्द चिड़ियों की तरह रहती है- आज की कविता
( प्रसिद्ध कवि और छायाकार त्रिजुगी कौशिक जी नहीं रहे । जन संपर्क विभाग में नौकरी करते हुए उन्होंने बस्तर की जो तस्वीर खींची, वह देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में मुख्यपृष्ठ प्रकाशित हुई, आवरण पृष्ठ बनी । कौशिक के परम मित्र प्रगतिशील कवि विजय सिंह ने अपने फेसबुक वॉल में उनकी एक कविता प्रसारित की है । यह कविता निजी तौर पर विजय सिंह के लिए था , प्रिय मित्र त्रिजुगी कौशिक को श्रद्धांजलि सहित )

–त्रिजुगी कौशिक ——————————-+++
शब्द चिड़ियों की तरह रहती है
तुम्हारे पास …
तुमने खूब कवितायें
तितलियों की तरह पाल रखी है
खिड़की के बाहर
तुम दुनिया खोलकर
लिखते रहते हो जीवन
सिर्फ कवितायें लिखते तो
कोई और बात होती
तुम तो लिखते हो
शहर के सीने में
धड़कते प्रेम को
दुख को सुख को
संगी को
साथी को
काके को
जो सचमुच
कविता की तरह जीते हैं
तुम्हारे पास शहर का
बंद टाकीज है
पुराना खाँसता पुल है
रजाई धुनकता
रफीक चाचा है
शब्द गढता कम्पोजिटर है और
हँसती कालेज जाती लड़कियाँ हैं
सोचता हूँ एक अकेला आदमी
इतने बड़े शहर को …….
इतने सारे लोगो को
एक साथ कैसे प्यार करता है
कैसे झिड़कता है
कैसे गुस्साता है और
रात मे बैठकर कवितायें लिखता है
कविता लिखना जरूरी नही है
जरूरी है कविताओं के संवेदना को दिल मे रखकर जीना
भावनाओं मे बहकर
निष्कपट प्रेम करना
बावजूद तुम ठगे जाओगे
फिर भी हँसते हो
बत्तीस दाँतो से
मेरे मित्र आओ
कुछ नया करते हैं
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