उड़ीसा मूल के महाज्ञानी ब्राह्मणों के हाथों बस्तर के विकास का रथ

बस्तर के विकास की गति में उड़ीसा मूल के महाज्ञानी ब्राह्मणों के हाथ में  हैं । बस्तर में विधायकों और मंत्रियों के निजी सहायकों को देख लीजिए । इनके निजी सहायकों में महाज्ञानी ब्राह्मणों की संख्या बलिराम कश्यप के जमाने के पहले से ही 80% से अधिक है । बस्तर में सांसद आदर्श ग्राम चपका ऐसे ही नहीं घोषित हुआ है । एक पूर्व विधायक ने सांसद दिनेश कश्यप को खुले शब्दों में कह दिया है कि “आदिवासियों की बात सांसद और मंत्रियों तक नहीं पहुँच पाती है । वे (उड़ीसा मूल के ब्राह्मण) मंत्री विधायक और सांसद को चला रहे हैं ।”

आदिवासियों के आवेदन सांसद, विधायक एवं  मंत्रियों के कार्यालयों की डस्टबीन में नजर आते हैं । तो वहीँ उड़ीसा मूल के ब्राह्मणों के आवेदन पर फोन से लेकर फैक्स, मोबाइल से लेकर कंप्यूटर के ईमेल तक घनघनाते हैं ।

बस्तर के ऐतिहासिक दशहरा का बजट लाखों में है । लेकिन ग्रामीण आदिवासियों को ढ़ंग से कपड़े और चप्पल तक नहीं मिल पाते हैं । रुकने खाने की व्यवस्था भी औसत दर्जे की भी नहीं होती है । आप आने वाले बस्तर दशहरा में यह नजारा फिर से देख सकते हैं ।

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