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दीपक बनाने वाले कुम्हारों के घर में है अंधेरा

सुकमा– वैसे आप यह ख़बर पढ़ रहे होंगे आगे पढ़ने से पहले मेरी आपसे रिकवेस्ट है यह वीडियो भी *जरूर देखें* इस वीडियो मेंकुम्हारों के ऐसे परिवार का दर्द है *दर्द* के साथ *सिसकती* आवाज में वे आपसे *कुछ कहना चाहते* हैं देखें जरूर.. क्योंकि जहांआज के आधुनिकता की दौड़ में दीपावली के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण *दीपक और लक्ष्मी गणेश* की मूर्तिया *गढ़ने वाले कुम्हार* अपने घरों को रौशन करने से वंचित है, मिट्टी के दीये की जगह *बल्ब व मोमबत्तियाें* की चकाचौंध में गुम हो रहे हैं *कुम्हार के परिवार,* और अपनी पुस्तैनी कला एवं व्यवसाय से जैसे विमुख हो रहे हैं। ऐसे परिवार हैं जहां *आर्थिक संकट* हमेशा बनी रहती है, आज केबदलते दौर में भी यहां परिवार *लाचार और बेबसी* की जिंदगी जीने को मजबूर हैं, कुम्हारों को उम्मीद है इस बार दिवाली पर्व में लोगमिट्टी के दिये खरीदेंगे, ताकि सबकी तरह कुम्हार के *घर में भी रौशनी* हो, बच्चों को *नये कपड़े* दिला सकें, बस इतनी सी हमारी*विनती है साहेब, हम गरीब हैं साहब,* मात्र दो रुपये का एक दीप है, *खरीद* लो साहब…..

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*दर्द और बेबसी*

कुम्हार का परिवार

के शंकर सुकमा

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