बंदूकों का दोष नहीं है
हाथ में जिनके हैं बंदूकें चाहे जिसको मारें, फूंकें उनका कोई दोष नहीं है मरे निहत्थे जितने लोग लगा जिन्हें...
हाथ में जिनके हैं बंदूकें चाहे जिसको मारें, फूंकें उनका कोई दोष नहीं है मरे निहत्थे जितने लोग लगा जिन्हें...
आज की कविता अपना ख़ून देखकर वो सहमा रहता है कई रोज़ कई रोज़ ताकता है आसमान अगर गिर जाए...
आज की कविता वो बनना चाहता था 4 साल की उम्र में भिश्ती 6 साल की उम्र में पुलिस का...
उसका भोजन कई लोग चखते हैं, उससे पहले उसको डर है किसी रोज़ कोई ज़हर मिला देगा उसके खाने में...
आज की कविता वो महज कुछ लोगों के बीच रहता है वो महज कुछ लोगों की बात सुनता है वो...