तानाशाह से मत डरो – 2
उसका भोजन कई लोग चखते हैं, उससे पहले उसको डर है किसी रोज़ कोई ज़हर मिला देगा उसके खाने में...
उसका भोजन कई लोग चखते हैं, उससे पहले उसको डर है किसी रोज़ कोई ज़हर मिला देगा उसके खाने में...
-दिवाकर मुक्तिबोध मई में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिलने की शायद उसकी उतनी चर्चा नहीं...
नई दिल्ली। केरल उच्च न्यायालय की दो सदस्यीय खंडपीठ ने यह निर्णय दिया है कि माओवादी होना कोई अपने आप...
वर्तमान में व्याप्त असमानता पिछले 100 वर्षों में सबसे अधिक है, यानी गुलामी के दौर में भी हालात बेहतर थे।...
सब चले गए थे। उनके जाने के बाद शाम भी दिन को लिए जा चुकी थी। हवा अपने पीछे उमस...
आज की कविता वो महज कुछ लोगों के बीच रहता है वो महज कुछ लोगों की बात सुनता है वो...
दुर्ग । पुलिस विभाग दुर्ग द्वारा चलाये जा रहे " जिओ खुल कर " अभियान ने अब गति पकड़ लिया...
आज की कविता मैं चाहती हूँ दुनिया की तमाम स्त्रियां एक दिन की हड़ताल पर चली जाएं माँएं छुट्टी लें...
मयंक सक्सेना पिछली रात, हम कैब लेकर कहीं जा रहे थे…कैब में से मैं उतर कर एटीएम तक गया…इसी बीच...
रुचिर गर्ग आर्टिकल 15 - अनुभव सिन्हा ने हौसला तो दिखाया है ,लेकिन एक घटना पर आधारित फिल्म दलित उत्पीड़न...