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छत्तीसगढ़ राज्य का पहला मुख्यमंत्री अपने अंतिम दिनों में अपनी सियासत की जमीन तलाशता रहे

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अजीत जोगी का निधन भारतीय राजनीतिक के लिए एक बहुत बड़ा नुकसान है। उन्होंने भोपाल से मैकेनिकल इंजीनियर की पढ़ाई की थी फिर यूपीएससी की परीक्षा दी और सामान्य वर्ग में मेरिट लिस्ट में तीसरे स्थान पर रहे ऐसे बहुत कम आईएएस होते हैं जो लगातार 14 साल तक कलेक्टर रहें।वह इंदौर में लंबे समय तक कलेक्टर रहे, रायपुर में भी कलेक्टर रहे।


जिन दिनों जोगी रायपुर में कलेक्टर हुआ करते थे, उन्हीं दिनों राजीव गांधी इंडियन एयरलाइंस के पायलट थे. संयोग था कि उनका विमान कभी-कभी रायपुर भी आता था. कलेक्टर का स्थाई आदेश था कि जिस दिन पायलट के रूप में राजीव गांधी का नाम आए, उन्हें पहले सूचना मिल जाए. नियत समय पर कलेक्टर जोगी घर से चाय नाश्ता लेकर हाज़िर होते थे.


इंदौर में कलेक्टर रहने के दौरान ही वे राजनीति में आए।
मध्यप्रदेश में तेंदूपत्ता के सहकारीकरण जैसी कई योजनाएं उनकी खोज थी। अजीत जोगी हिंदी ,अंग्रेजी और छत्तीसगढ़ की कई बोली भाषाओं में पारंगत थे । बहुत नपा तुला बोलते थे और पांच जनपथ के बड़े करीबी लोगों में गिने जाते थे।


राजनीतिक जोड़-तोड़ और पुत्र मोह में उनसे कई गलत निर्णय भी हुए और तभी छत्तीसगढ़ राज्य का पहला मुख्यमंत्री अपने अंतिम दिनों में अपनी सियासत की जमीन तलाशता रहा। बेहद बौद्धिक, प्रखर और प्रशासनिक व तकनीकी रूप से सशक्त लोग राजनीति में आते हैं तो यह बेहद सकारात्मक होता है ।इसीलिए अजीत जोगी का निधन भारतीय राजनीति के लिए नुकसान है। उनकी पत्नी रेणु जोगी डॉक्टर हैं और विधायक भी।

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पंकज चतुर्वेदी

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