Home SliderTop Newsछत्तीसगढ़देशबस्तर

अदृश्य युद्ध के दौर में

IMG 20200516 WA0003

तारण प्रसाद सिन्हा

निश्चित ही यह एक अकल्पनीय समय है। वह घटित हो रहा है, जो किसी ने कभी सोचा तक नहीं था। आगे बढ़ती हुई एक सदी अचानक थम गई, बीती हुई सदी अपने तमाम जख्मों के साथ फिर प्रकट हो गई। फिर वही भूख, पलायन, गरीबी और बेबसी, बेबसों का वही रेला।
कश्मीर से कन्याकुमारी तक दुख और दर्द का समुंदर ठाठे मार रहा है। हर कोई आवाक् है, बदहवास है। क्या मजदूर, क्या मालिक, क्या शासन, क्या प्रशासन…हर पल एक नयी चुनौती सामने आती है, रूप बदल बदल कर नयी नयी मुश्किलें नुमाया होती हैं…लेकिन जंग जारी है। इनसान लड़ रहा है। जीत रहा है।
यह समय पूरी दुनिया पर कहर बनकर टूट रहा है। पूरी दुनिया में श्रम पर जिंदा रहने वाले लोग मुश्किल में हैं। भारत में भी। कोरोना से उपजी परिस्थितियों ने प्रवासी श्रमिकों को सड़क पर ला दिया है। घर लौट रहे हजारों-हजार मजदूरों का रेला हर रोज एक राज्य से दूसरे राज्य दाखिल हो रहा है।

IMG 20200516 WA0002


छत्तीसगढ़ का भूगोल ही कुछ ऐसा है कि यह भारत का चौगड्डा है। उत्तर से दक्षिण, पूरब से पश्चिम जाने वाले रास्ते यहीं से होकर गुजरते हैं। इसीलिए घर लौट रहे पैदल मजदूरों के सबसे बडे़ जत्थे इस राज्य को लांघते हुए आगे बढ़ रहे हैं। किस दिन, किस पल, कितनी संख्या में मजदूर छत्तीसगढ़ की सीमा में दाखिल होंगे, कुछ पता नहीं होता।
कोरोना की आहट मिलने के तुरत बाद से ही छत्तीसगढ़ सरकार और समाजसेवी पीडि़तों को राहत पहुंचाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। दूसरे प्रदेशों में कमाने-खाने गये मजदूरों की सुरक्षित घर वापसी के लिए ट्रेनों-बसों का इंतजाम करने, उनसे संपर्क बनाए रखने, उन्हें क्वारंटाइन करने और क्वारांटाइन की अवधि में उनकी सेहत तथा सुविधाओं का खयाल रखने में बडा़ अमला जुटा हुआ है। साथ ही छत्तीसगढ़ से होकर गुजरने वाले अन्य राज्यों के अनगिनत मजदूरों को ठहराने, उनके भोजन आदि की व्यवस्था करने, उन्हें छत्तीसगढ़ की एक सीमा से दूसरी सीमा तक पहुंचाने के लिए वाहनों का प्रबंध करने में भी सैकडो़ लोग जिसमें ज़िला प्रशासन ,स्वास्थ्य , परिवहन आदि के साथ सामाजिक संगठन लगे हुए हैं। तपती हुई दोपहरियों में, संक्रमण के तमाम खतरों के बीच, वे भी मजदूरों के पसीनों में अपना पसीना मिला रहे हैं। अपने परिवार से दूर रहकर वे भी अपनी सामाजिक जिम्मेदारियां पूरी कर रहे हैं।
कोरोना के विषाणुओं की तरह चुनौतियां भी अदृश्य हमले करती हैं। चौक-चौराहों पर अपनी संवेदनाओं की ढाल लेकर तैनात योद्धा इनसे पल-पल मुकाबिल है। इस कठिन लडा़ई में कभी कभी चुनौतियां भी भारी पड़ सकती हैं। असंख्य लोगों के भोजन और वाहनों के इंतजाम में समय की ऊंच-नीच हो सकती है। लेकिन यह समय कमी निकालने का नही बल्कि काम करने वालों को प्रोत्साहित करने और उनका हौसला बढ़ाने का है ।यह एक युद्ध है और युद्ध को युद्ध की तरह ही देखना और लड़ना होगा। चुनौतियां हौसलों से ही हारा करती हैं, हर हाल में हमें अपने योद्धाओं का हौसला बनाए रखना होगा।

IMG 20200516 WA0004

तारण प्रसाद सिन्हा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *