असंवैधानिक और गैरकानूनी बैलाडीला पहाड़ की जनसुनवाई

दंतेवाड़ा@ भूमकाल समाचार

विगत 50 वर्षों से  एन.एम.डी. सी. परियोजना बैलाडीला के पहाड़ों पर कच्चे लौहे का खनन कर रहा है और बस्तर संभाग में संविधान के पांचवी अनुसूची लागू है व पेसा कानून भी प्रभावी है।

इस बैलाडीला खदान से 52 गाँव प्रभावित है पुरे  गाँव की वर्त्तमान स्थिति को देखते हुए कहा जा सकता है  आज तक यहाँ खनन करने से  खदानों से बहे  लोहे के चूर्ण खेतो को बंजर कर चुका है  और इसका मुआवजा  कुछ ग्रमीणों को ही मिलता है वो भी नही के बराबर, मुआवजा देना इसका समाधान नही है। प्रत्येक वर्ष लोहे के चूर्ण की मिट्टी पानी की बहाव में खेतों के बीच जा रही है और इसको रोकने के लिए आज तक राष्ट्रीय खनिज विकास निगम परियोजना द्वारा कोई उपाय नही किया गया।

इस मिट्टी की बहाव से कई हजारो एकड़ ग्रामीणों की जमीन बंजर हो चुकी है। वर्तमान में NMDC निक्षेप क्रमांक 10 का 3.2 मिलियन टन से 4.2 मिलियन टन उत्पादन किया जा रहा है । इसको बढ़ा कर प्रतिवर्ष 6 मिलियन टन उत्पादन करने के लिए यहाँ जनसुनवाई की जा रही थी। इन खदानों से मूल निवासियों की भूमि बहुत अधिक प्रभावित हो रही है। पर्यावरण में धूल के महीन कण से पर्यावरण भी प्रदूषित हो रहा है।

भारतीय सविंधान की पांचवी अनुसूची के तहत लोक सुनवाई के पूर्व प्रभावित ग्राम के लोगों को नियमतः सुचना दी जानी चाहिए थी । लेकिन इस भाजपा शासित प्रदेश में आदिवासी कानूनों को ताक पर रखकर किसी प्रकार की सूचना नही दी गयी। लिखित में किस प्रकार की जानकारी नही दी गयी। आदिकाल से चल आ रहा ग्राम के गायता  मांझी  पेरमा  कोटवार एवं ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव तक  को जानकारी नही दी । जबकि खदान से प्रभावित गाँवों में ग्राम सभा आयोजित किया जाना चाहिए था। यह संविधान का खुला उल्लंघन है जिसके कारण इस लोक सुनवाई का जो दंतेवाड़ा के वन काष्टागार में गुपचुप आयोजित की गई थी इसका ग्रामीणों ने खुलकर विरोध किया है।

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